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निर्भया के दोषी की अजीब दलील, दिल्ली में लोग प्रदूषण से मर रहे, मुझे फांसी क्यों

नई दिल्ली। निर्भया कांड के दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। अक्षय सिंह को निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की सुनवाई में फांसी की सजा सुनाई गई है। अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा पर फिर से विचार करने की मांग की है। दोषी ने सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने में हुई देरी के लिए माफी की बात भी कही है।

याचिका में अक्षय ने अजीबोगरीब दलील देते हुए कहा है कि दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है। दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील हो चुकी है। उसने यह भी कहा है कि यहां का पानी भी जहरीला हो चुका है। ऐसे में जब खराब हवा और पानी के चलते उम्र पहले से ही कम से कम होती जा रही है फिर फांसी की सजा की जरूरत क्यों है?

इतना ही नहीं अक्षय की तरफ से दायर पुनर्विचार अर्जी में वेद पुराण और उपनिषद में लोगों की हजारों साल तक जीने का हवाला भी दिया गया है। अर्जी में कहा गया है कि इन धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक सतयुग में लोग हजारों साल तक जीते थे। त्रेता युग में भी एक-एक आदमी हज़ार साल तक जीता था, लेकिन अब कलयुग में आदमी की उम्र 50-60 साल तक सीमित रह गई है।

उसने कहा है कि बहुत कम लोग 80-90 साल की उम्र तक पहुंच पाते हैं। जब कोई व्यक्ति जीवन की कड़वी सच्चाई और विपरीत परिस्थितियों से गुजरता है तो वो एक लाश से बेहतर और कुछ नहीं होता। गौरतलब है कि नौ जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप मामले में तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। चौथे दोषी अक्षय ने अब तक पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की थी। कोर्ट ने कहा था कि सारी सामग्री पर गौर करने के बाद हम पाते हैं कि पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं है। माना जा रहा है कि चौथे दोषी की याचिका का भी यहीं हस्र होगा।