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भारत का ये शहर बनता जा रहा कोरोना का गढ़, इटली जैसे हो सकते हैं हालात

नई दिल्ली। देश में लोगों को कोरोना से बचाने के लिए सरकार कर्फ्यू लगा रही है और लॉकडाउन कर रही है. इसी बीच दावा किया जा रहा है कि राजस्थान के भीलवाड़ा में कोरोना वायरस थर्ड स्टेज में पहुंच चुका है। भीलवाड़ा में कोरोना का प्रकोप कुछ ज्यादा ही दिख रहा है।

राजस्थान का भीलवाड़ा करीब चार लाख की आबादी का शहर है। यह शहर भारत में कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट साबित हो सकता है।यहां मंगलवार शाम तक 16 पॉजिटिव केस आ चुके हैं। ये सिलसिला 52 साल के एक मरीज के एक निजी अस्पताल में पहुंचने से शुरू हुआ था। अब इस अस्पताल के तीन डॉक्टरों समेत 13 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव हैं और पूरे शहर की जान आफत में है।

यहां ढाई सौ लोग सरकारी अस्पताल में और करीब पांच हजार अपने घरों में क्वारनटीन में हैं।भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. राजन नंदा के मुताबिक अब उनका पूरा ध्यान कम्युनिटी आउटब्रेक के खतरे से निपटने पर है।

डॉ नंदा ने कहा, ‘अभी हमारे अस्पताल में 11 कोरोना संक्रमित भर्ती हैं। हमारी क्षमता 100 बिस्तरों की है
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मदद से हमने निजी अस्पतालों को जोड़ा है और अभी हमारी क्षमता बढ़कर 450 बिस्तरों की हो गई है। किसी भी समय अगर कम्युनिटी आउटब्रेक होता है तो हम मरीजों की देखभाल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

डॉ नंदा कहते हैं, ‘अभी हमारी जितनी जरूरत है, सरकार की ओर से हमें उतने उपकरण और सामान मिल रहे हैं.

भीलवाड़ा में 8 मार्च को एक मरीज ब्रजेश बांगड़ मेमोरियल अस्पताल पहुंचा था।उसे सांस लेने में दिक्कत थी और निमोनिया था. मरीज ने अपनी यात्राओं के बारे में अस्पताल को जानकारी नहीं दी और ना ही उससे पूछा गया.अस्तपाल के निदेशक डॉ. आलोक मित्तल ने इस मरीज का परीक्षण किया और उसे आईसीयू में भर्ती कर दिया. आईसीयू में छह और मरीज भर्ती थे।इस मरीज की हालत नहीं सुधरी तो उसे भीलवाड़ा से ढाई सौ किलोमीटर दूर जयपुर के एक निजी अस्पताल भेज दिया गया। यहां यह मरीज दो अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती रहा. यहां के अस्पतालों में भी इस मरीज का कोरोना के लिए टेस्ट नहीं किया गया।

13 मार्च को इस मरीज की मौत हो गई। अभी ये तो पता नहीं चला है कि इस मरीज ने कोरोना संक्रमण फैलाया या इसे भीलवाड़ा के ब्रजेश बांगड़ अस्पताल से कोरोना हुआ, लेकिन भीलवाड़ा में अब ये संक्रमण ब्रजेश बांगड़ अस्पताल तक सीमित नहीं है। डॉ. राजन नंदा कहते हैं कि यही सबसे चुनौतीपूर्ण बात है।