उत्तर कोरिया में हुए 2026 के संसदीय चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी ने एक बार फिर भारी बहुमत हासिल किया है। सरकारी मीडिया कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के अनुसार, 15 मार्च 2026 को हुए सुप्रीम पीपुल्स असेंबली चुनाव में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके सहयोगियों को 99.93% वोट मिले और सभी 687 सीटों पर जीत दर्ज की गई।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पंजीकृत मतदाताओं में से 99.99% ने मतदान किया। केवल 0.0037% लोग विदेश या समुद्र में होने के कारण वोट नहीं डाल सके, जबकि महज 0.00003% लोगों ने मतदान से परहेज किया। चुनाव में 99.93% मतदाताओं ने उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया, जबकि 0.07% ने विरोध में वोट डाले। इस चुनाव की सबसे खास बात यही रही कि दशकों बाद पहली बार राज्य मीडिया ने विरोध में पड़े वोटों का जिक्र किया। 1957 के बाद यह पहला मौका है जब इस तरह का आंकड़ा सार्वजनिक किया गया है।
हालांकि उत्तर कोरिया में इस तरह के एकतरफा चुनाव परिणाम आम माने जाते हैं, लेकिन 0.07% विरोधी वोटों ने वैश्विक स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां यूजर्स इन मतदाताओं को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं।
उत्तर कोरिया के चुनाव कानूनों के तहत संसद के लिए 687 प्रतिनिधि चुने जाते हैं, जिनमें श्रमिक, किसान, बुद्धिजीवी और अधिकारी शामिल होते हैं। हर निर्वाचन क्षेत्र से केवल एक ही उम्मीदवार खड़ा होता है, जिससे चुनाव प्रक्रिया को अक्सर औपचारिक या दिखावटी माना जाता है। मतदाताओं के पास ‘हां’ या ‘नहीं’ का विकल्प होता है, लेकिन ‘नहीं’ चुनना जोखिम भरा माना जाता है। इस चुनाव में किम यो जोंग सहित कई प्रमुख चेहरे भी निर्वाचित हुए हैं। वहीं, किम जोंग उन ने एक कोयला खदान में जाकर मतदान किया और युवा कामगारों की सराहना की।




