हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ‘विकसित भारत- जी राम जी योजना’ को लेकर विपक्ष दुष्प्रचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह योजना पुराने मनरेगा की कमियों को दूर कर ग्रामीण, श्रमिक और किसानों के कल्याण के लिए लाई गई है।
सीएम सैनी ने कहा, “इस योजना में रोजगार गारंटी 125 दिन की गई है और भ्रष्टाचार रोकने के लिए बायोमेट्रिक भुगतान जैसे उपाय शामिल किए गए हैं। यह योजना पुरानी मनरेगा का स्थान लेती है और उसमें रह गई कमियों को सुधारने का हिस्सा है।”
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 2013 की कैग रिपोर्ट में यूपीए शासन के दौरान फर्जी लाभार्थियों और धन हेराफेरी के मामले सामने आए थे। वहीं पंजाब में किए गए एक सोशल ऑडिट में 13,304 ग्राम पंचायतों में से केवल 5,915 में काम की जांच हुई और लगभग 10,663 वित्तीय गबन के मामले पाए गए, जिनमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सैनी ने कहा कि पुराने निगरानी तंत्र की कमी के कारण मेहनती मजदूरों को उचित मजदूरी नहीं मिल पाती थी। इसके विपरीत, नई योजना श्रमिकों को उचित मुआवजा और रोजगार गारंटी सुनिश्चित करती है। नए कानून से हरियाणा के मजदूरों को प्रतिवर्ष औसतन 10 हजार रुपए से अधिक लाभ होगा। राज्य में न्यूनतम मजदूरी प्रतिदिन 400 रुपए है, जबकि पंजाब में 339 और हिमाचल में 236 रुपए प्रतिदिन दी जाती है। इस वर्ष हरियाणा में 52% अनुसूचित जाति और 65% महिला श्रमिकों को रोजगार मिला।
सीएम ने बताया कि ग्राम पंचायत की योजनाओं को पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान से जोड़ा गया है, ताकि हर काम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो। केंद्र सरकार ने इस वर्ष योजना के लिए 1,51,282 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 88 हजार करोड़ थी। भ्रष्टाचार रोकने के लिए योजना में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, डिजिटल भुगतान, जियो टैगिंग और सैटलाइट इमेजरी जैसे उपाय किए गए हैं। सैनी ने कहा कि इसका उद्देश्य वास्तविक श्रमिक लाभार्थियों को सीधे सहायता पहुंचाना है, जिन्हें पिछली सरकारों ने धोखा दिया।




