
सनस्क्रीन के इस्तेमाल में इन बातों का रखें ख्याल
-सनस्क्रीन का उपयोग समय सीमा के हिसाब से किया जाना चाहिए। अगर आप 4 घंटे से ज्यादा समय के लिए घर से बाहर हैं तो आपको कम से कम 2 बार सनस्क्रीन की परत त्वचा पर अप्लाई करनी होगी।
-बाजार में कई तरह के सनस्क्रीन उपलब्ध होंगे। इसमें लोशन, क्रीम से लेकर पिल्स तक उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि आपकी त्वचा के हिसाब से आप पर कौन सा सनस्क्रीन सूट करता है। लोशन भी वॉटर और ऑइल बेस्ड दोनों तरह के हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि जब सनस्क्रीन खरीद रहे हों तो अपनी त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखें। उदाहरण के लिए ऑइली त्वचा के लिए ऑइल बेस्ड लोशन ठीक नहीं होगा।

-विशेषज्ञों की मानें तो एसपीएफ 15 या इस से कम का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा सनबर्न से बचा सकता है। यह स्किन कैंसर व त्वचा पर असमय आने वाले उम्र के निशानों से बचाव में सक्षम नहीं होता।
-अगर आप बीच या किसी अन्य पानी वाले जगह पर जा रहे हैं और वाटर रेजिस्टेंस सनस्क्रीन का उपयोग करने वाले हैं तो यह ध्यान रखें कि इस तरह के सनस्क्रीन वॉटरप्रूफ नहीं होते। वॉटर रेजिस्टेंस सनस्क्रीन का मतलब होता है पानी में रहने या पसीना आने की सूरत में ज्यादा से ज्यादा 1 घंटे तक उसका असर बने रहना। इसलिए ऐसी स्थिति में हर 2 घंटे में सनस्क्रीन का उपयोग करना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।
-बाजार में केमिकल युक्त सनस्क्रीन के साथ ही मिनरल युक्त सनस्क्रीन, स्प्रे आदि भी उपलब्ध हैं। यदि आपको इनमें से चुनने में ज्यादा दिक्कत हो तो एक बार किसी एक्सपर्ट की सलाह ले लें।
-ड्राई स्किन के लिए ऐसे सनस्क्रीन चुनें जिनमें त्वचा को नम बनाए रखने वाले पर्याप्त इंग्रेडिएंट्स हों। जैसे कि ग्लिसरीन और हायलूरॉनिक एसिड युक्त सनस्क्रीन। वहीं सामान्य त्वचा या नॉर्मल स्किन के लिए सामान्यतः कोई भी सनस्क्रीन चुना जा सकता है।

-यदि आपकी त्वचा अधिक संवेदनशील यानी सेंसेटिव है तो आप फिजिकल सनस्क्रीन चुन सकते हैं या फिर डॉक्टर की सलाह से कोई सनस्क्रीन अपना सकते हैं। फिजिकल सनस्क्रीन को मिनरल सनस्क्रीन के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे स्किन टाइप वालों को खुशबू वाले या अधिक रसायन युक्त सनस्क्रीन का उपयोग करने से बचना चाहिए।






