नई दिल्ली। कांग्रेस ने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द किए जाने को उन्हें चुप करने की साजिश करार दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड्गे राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, उन्होंने (भाजपा) उन्हें अयोग्य ठहराने के सभी तरीके आजमाए। जो सच बोल रहे हैं उन्हें वो रखना नहीं चाहते, लेकिन हम सच बोलते रहेंगे। हम जेपीसी की मांग जारी रखेंगे, अगर जरूरत पड़ी तो हम लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल जाएंगे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट में लिखा कि ‘जैसी भाजपा, संघ और मोदी जी से उम्मीद थी, मोदी अदाणी संबंधों पर वो राहुल गांधी को संसद में बोलने नहीं देंगे, वही हुआ। राहुल जी के चार साल पुराने बयान पर उनकी संसद की सदस्यता समाप्त कर दी। लोकतंत्र के मंदिर में नहीं बोलने दोगे तो जनता की अदालत में जाएंगे।’
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘हमारी ये लड़ाई कानूनी और राजनीतिक तौर पर जारी रहेगी। हम इससे डरेंगें और चुप नहीं होंगे। जयराम रमेश ने लिखा कि अदाणी मामले पर जेपीसी का गठन करने के बजाय राहुल गांधी के पक्ष को निरस्त कर दिया!’
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि मैं इस कार्रवाई की तेजी से हैरान हूं। कोर्ट के फैसले के 24 घंटे के भीतर ही यह कार्रवाई की गई है, जब कि इस मामले में अपील लंबित है। उन्होंने कहा कि यह ओछी राजनीति है और लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ा झटका लगा है। राहुल की संसद सदस्यता खत्म हो गई है। राहुल गांधी केरल के वायनाड से सांसद थे। बता दें कि सूरत की एक अदालत ने ‘मोदी उपनाम’ से जुड़े बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि के एक मामले में उन्हें गुरुवार को दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। साथ ही उनपर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई हो तो ऐसे में उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत ने IPC के सेक्शन 504 के तहत गांधी को दोषी करार दिया, जो शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित है। फैसला सुनाए जाते समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे। मोदी सरनेम मानहानि मामले में राहुल गांधी की न सिर्फ सदस्यता गई है, बल्कि अगर उपरी अदालत से उनको राहत नहीं मिलती है, तो वह अगले 8 सालों के लिए चुनावी राजनीति से बाहर हो जाएंगे। दरअसल, कानून कहता है कि 2 साल तक अगर किसी विधायक या सांसद को सजा होने पर उसकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। इसके बाद सजा खत्म होने पर भी वह 6 साल तक चुनाव लड़ने पर अयोग्य माना जाएगा। ये नियम कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद लागू हो जाता है। ये नियम जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 8 (3) के तहत लागू होता है।




