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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगा 355 मिलियन डॉलर का जुर्माना, बैंकों को ठगने का है आरोप

नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने 355 मिलियन डॉलर (करीब 29,46,09,17,500 रुपये) का जुर्माना लगाया है। साथ ही उन पर तीन साल का बैन भी लगाया गया है। ट्रंप का रियल एस्टेट का बड़ा बिजनस है जो पूरी दुनिया में फैला है। ट्रंप पर अपनी नेटवर्थ को बढ़ाचढ़ाकर दिखाकर बैंकों को ठगने का आरोप है। ट्रंप को न्यूयॉर्क राज्य में कंपनी के निदेशक के रूप में काम करने से तीन साल के लिए रोक दिया गया है। उनके बेटों डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप ने भी 4-4 मिलियन अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भरने को कहा है। उन्हें दो साल के लिए निदेशक के रूप में काम करने से रोक दिया गया है।

धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने ट्रम्प के खिलाफ 90 पन्नों का फैसला सुनाया है। जनवरी में समाप्त हुए ट्रायल में डोनाल्ड ट्रम्प और उनके दो बेटों को अपनी संपत्तियों में भारी वृद्धि के लिए जिम्मेदार पाया गया था। हालांकि, ट्रम्प और उनके बेटों ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मामले को “मेरे साथ धोखाधड़ी” और “राजनीतिक खेल” करार दिया है। जज आर्थर एंगोरोन का फैसला एक महीने की लंबी सुनवाई के बाद आया है।

अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने जज से अनुरोध किया था कि वह डोनाल्ड ट्रंप को 370 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने के लिए कहें। लेकिन जज ने अपने फैसले में 355 मिलियन डॉलर का भुगतान करने को कहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके बेटों पर बैंकों और बीमा कंपनियों के साथ ही अन्य लोगों से धोखाधड़ी कर रियल एस्टेट का एक बड़ा साम्राज्य स्थापित करने का आरोप है। ट्रम्प और उनके बेटों पर आरोप है कि उन्होंने लाभ लेने के लिए अपनी संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। हलांकि ट्रम्प और उनके बेटों ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। वहीं, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस मामले को अपने साथ धोखाधड़ी करार दिया है।

न्यूयॉर्क की कोर्ट ने इससे पहले कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी एलन वीसेलबर्ग को भी एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया था। उनपर भी कंपनी में काम करने के लिए तीन साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। ट्रम्प के वकील ने इस फैसले को अन्याय बताते हुए कहा कि यह आदेश राजनीति से प्रेरित है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH