लखनऊ। जहाँ स्मार्ट रोड बननी चाहिए थी, वहां नगर निगम ने बना दिया कूड़ा डंपिंग ग्राउंड। इस क्षेत्र से गुजरना अब किसी सज़ा से कम नहीं। दुर्गंध इतनी तीव्र है कि राहगीरों को नाक पर रुमाल रखकर निकलना पड़ता है। आसपास झुग्गियों की बस्तियाँ बस गई हैं और मवेशियों का अड्डा बन चुका है। हालात यह हैं कि दुर्गंध घरों के अंदर तक पहुंच रही है, और मक्खियों की भरमार ने जनजीवन दूभर कर दिया है।नियमित सफाई का अभाव भी एक बड़ी समस्या है। कूड़ा कई-कई दिन तक नहीं उठाया जाता, जिससे क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य संबंधी खतरे झेलने पड़ रहे हैं।
खुले नाले बने ‘मौत के कुएं’: दावे फेल, खतरा कायम
ठाकुरगंज में नाले में डूबने से हुई मौत के बाद नगर निगम ने सभी नालों को ढंकने का दावा किया था*, लेकिन वृंदावन कॉलोनी में यह दावा खोखला साबित हुआ। यहां अब भी जगह-जगह खुले और टूटे हुए नाले मौजूद हैं। इनकी गहराई इतनी है कि बड़े जानवर तक गिर चुके हैं।स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लगातार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन से कोई सुनवाई नहीं हो रही। लगता है नगर निगम किसी अगली दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।
सड़कें बनीं खतरनाक गड्ढे: अराजकता और घटिया निर्माण का नतीजा
नई बनी सड़कें निर्माण में लापरवाही के कारण टूट चुकी हैं, जबकि पुरानी सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। क्षेत्र में अराजकता का माहौल है। हरित पट्टियों पर शराब के ठेके खोल दिए गए हैं और अनियंत्रित रूप से झुग्गियां बसा दी गई हैं।स्ट्रीट लाइट्स या तो खराब हैं या गायब। इससे शाम के बाद महिलाओं का निकलना बेहद मुश्किल हो गया है।
स्थानीय निवासियों की शिकायतें:
रवि सिंह कहते हैं, “मुख्य सड़क के किनारे बना कूड़ा डंपिंग ग्राउंड हमारे लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। दुर्गंध इतनी है कि घर में भी रहना मुश्किल हो गया है। सांस लेना भी दूभर हो जाता है।”
एके द्विवेदी का कहना है, “इस कॉलोनी में नियमित सफाई नहीं होती। नालियां जाम हैं और बरसात में पानी घरों के अंदर तक घुस जाता है। कई जगह नालों के ढक्कन गायब हैं और मवेशी उनमें गिर चुके हैं। नगर निगम की उदासीनता बेहद खतरनाक साबित हो रही है।



