कॉमेडियन कपिल शर्मा के कनाडा स्थित कैप्स कैफे पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि इस हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े दो शूटर और एक इंटरनेशनल मास्टरमाइंड शामिल थे। कैफे पर तीन अलग-अलग मौकों पर फायरिंग हुई थी, जिसके बाद कपिल को धमकियां भी मिली थीं।
दो शूटर और मास्टरमाइंड की पहचान उजागर
जांच एजेंसियों के अनुसार, पंजाबी मूल के दो शूटर—शैरी और दिलजोत रेहल—ने जुलाई से अक्टूबर 2024 के बीच कपिल शर्मा के कैफे पर तीन बार फायरिंग की। इनके साथ तीसरे आरोपी सीपू का नाम सामने आया है, जिसे इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। तीनों आरोपी अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं। ये सभी कनाडा में गैंग के लिए काम कर रहे थे।
कैफे पर कब-कब हुई फायरिंग
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10 जुलाई – पहली फायरिंग
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7 अगस्त – दूसरी फायरिंग
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16 अक्टूबर – तीसरी फायरिंग
तीनों हमलों का सीधा लिंक लॉरेंस बिश्नोई के इंटरनेशनल नेटवर्क से जुड़ता दिखा है।
पहली गिरफ्तारी: बंधु मान सिंह का रोल सामने आया
कैप्स कैफे फायरिंग केस में पहली गिरफ्तारी लुधियाना से बंधु मान सिंह की हुई थी। वह इंटरनेशनल गैंग नेटवर्क की अहम कड़ी साबित हुआ।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बंधु मान सिंह कनाडा में बैठकर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए हथियार सप्लाई करता था। उसका संपर्क गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों और पाकिस्तानी डॉन हैरी चट्टा से था। हैरी चट्टा पर ISI के लिए काम करने और भारत में ड्रोन के जरिए हथियार गिराने के आरोप पहले भी लग चुके हैं।
हथियारों की सप्लाई भी उसी ने करवाई
जांच में पता चला कि तीनों शूटर्स के लिए हथियार भी बंधु मान सिंह ने ही उपलब्ध कराए थे। यह सप्लाई सोनू उर्फ राजेश खत्री के कहने पर हुई थी। सोनू खत्री, शूटर्स दिलजोत और गुरजोत का चचेरा भाई है। गोल्डी ढिल्लों के निर्देश पर सोनू ने अपने भाइयों से फायरिंग करवाने के लिए कहा था। बंधु मान सिंह 23 अगस्त को कनाडा से भारत आने के बाद दिल्ली पुलिस के रडार पर आया और लुधियाना में गिरफ्तार किया गया।
कपिल शर्मा के कैफे पर हुए हमलों ने कनाडा और भारत में फैले इंटरनेशनल गैंगवार और एक्सटॉर्शन नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है। पुलिस अब इस मामले को बड़े आपराधिक सिंडिकेट से जोड़कर गहराई से जांच कर रही है।




