ओडिशा के गंजाम जिले के दिगपहंडी ब्लॉक के बी. तुरुबुड़ी गांव के रहने वाले बलराम गौड़ा की मौत की खबर उनके परिवार तक पूरे एक महीने बाद पहुंची। बलराम पिछले 15 महीनों से मुंबई में मजदूरी कर रहे थे और तबीयत खराब होने पर घर लौटने के लिए एलटीटी–विशाखापट्टनम ट्रेन में सवार हुए थे। लेकिन बीच रास्ते क्या हुआ, इसका किसी को भी पता नहीं चल सका।
परिवार के अनुसार, बलराम ट्रेन से तंदूर स्टेशन पर उतर गए थे, जिसकी किसी को जानकारी नहीं थी। उनका मोबाइल लगातार स्विच ऑफ होने लगा, जिससे परिजन यह मान बैठे कि वह शायद किसी और जगह काम करने चले गए होंगे। कई दिनों तक कोई सूचना न मिलने पर परिवार ने खोज शुरू की।
तंदूर स्टेशन पर मिला सुराग
बलराम के भाई कृष्णचंद्र गौड़ा पहले उस स्टेशन पहुंचे, जहां से बलराम ने यात्रा शुरू की थी। वहां कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में पता चला कि तेलंगाना में ‘तंदूर स्टेशन’ भी है। वहां पहुंचकर कृष्णचंद्र ने रेलवे पुलिस द्वारा दिखाए गए फोटो में अपने भाई की पहचान कर ली।
बिना परिवार को बुलाए कर दिया अंतिम संस्कार
तंदूर रेलवे पुलिस ने आगे की जानकारी के लिए उन्हें मेन जीआरपी पिकाराबाद जंक्शन भेजा, जहां उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तस्वीरें दिखाईं गईं। रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था। परिवार का आरोप है कि बिना किसी सूचना के ही बलराम का अंतिम संस्कार कर दिया गया और शव उन्हें नहीं दिया गया।
घटना को एक महीना बीत चुका है, लेकिन परिवार सदमे से बाहर नहीं आ पाया है। शव न मिलने के कारण परिजनों ने गांव में भूसे से बने प्रतीकात्मक शरीर का संस्कार किया। कृष्णचंद्र कहते हैं, “ऐसी घटना किसी के साथ नहीं होनी चाहिए। सरकार से उम्मीद है कि हमें न्याय और मदद मिले। बलराम की रहस्यमयी मौत और परिवार को देर से मिली जानकारी ने पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।




