चेन्नई: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने IIT मद्रास में शुक्रवार को छात्रों को संबोधित करते हुए भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतंत्र, विदेश नीति और कोविड वैक्सीन अनुभव पर विस्तार से चर्चा की।
कोविड महामारी और वैक्सीन पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि उनके करियर में वैक्सीन देने का अनुभव सबसे भावुक करने वाला रहा। उन्होंने बताया कि उस समय विकसित पश्चिमी देशों ने अपनी आबादी के लिए 8 गुना ज्यादा वैक्सीन स्टॉक कर लिया था, जबकि छोटे देशों को 10 हजार डोज तक नहीं मिल रहे थे। उन्होंने कहा, “अगर भारत न देता तो हमें वैक्सीन सूंघने को भी न मिलती। हमने 1.4 अरब लोगों के लिए जिम्मेदारी उठाते हुए छोटे देशों को डोज देकर एकजुटता दिखाई।
जयशंकर ने बताया कि कोविड के दौरान अधिकांश पड़ोसी देशों को भारत से ही पहली वैक्सीन खेप मिली। उन्होंने बांग्लादेश की यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत हमेशा अच्छे पड़ोसियों को मदद, निवेश और साझेदारी देता है। श्रीलंका जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भारत ने 4 अरब डॉलर का पैकेज दिया। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत की तरक्की एक उठती लहर है, अगर भारत बढ़ेगा तो पड़ोसी भी बढ़ेंगे।”
भारत की प्राचीन सभ्यता पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया में बहुत कम सभ्यताएं हैं जो आधुनिक राष्ट्र बनकर आज तक जीवित हैं, और भारत उनमें से एक है। लोकतंत्र पर उन्होंने कहा कि भारत ने इसे अपनाकर इसे सार्वभौमिक विचार बनाया, अन्यथा यह केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह जाता विदेश मंत्री ने अंत में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को कभी दुश्मन या खतरे के रूप में नहीं देखा और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से ही दुनिया को बेहतर बनाने का प्रयास किया।




