फ़िल्म गोदान (Godaan) में प्रसिद्ध गायक कैलाश खैर ( Singer Kailash Kher) द्वारा गाया गया गीत देशवाशियों, आजकल सोशल मीडिया (Social Media) पर काफी पसंद किया जा रहा है, और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। जिसे डॉ प्रवीण तिवारी (Dr. Praveen Tiwari) पर फिल्माया गया है।

डॉ प्रवीण तिवारी एक वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और लेखन में अपनी पहचान बनाई है।
वह अब फिल्म ‘गोदान’ में खलनायक की भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म एक कमर्शियल फिल्म है, जिसमें एक्शन, गीत, भावनाएं और मनोरंजक कथानक का संतुलित संयोजन है। यह फ़िल्म गौ संरक्षण,गौ सेवा, गौमाता के सामाजिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व पर आधारित है।
आइये जानते हैं डॉ प्रवीण तिवारी का पत्रकारिता से सिनेमा तक के सफ़र के बारे मैं…
अंकित कुमार गोयल के साथ अभिनेता डॉ प्रवीण तिवारी का एक्सक्लुसिव इंटरव्यू…
डॉ तिवारी, आपने पत्रकारिता (Journalism) से सिनेमा (Cinema) तक का सफर कैसे तय किया?
जिस तरह यह फिल्म मुझे मिली ऐसे ही जीवन का हर अवसर मिला है, पुस्तक भी उन अवसरों में से एक है, 1 नहीं 7 पुस्तके लिखने का मौका मिला। इन पुस्तकों में चाहे सत्य की खोज जैसी आध्यात्मिक पुस्तक हो या आतंक से समझौता जैसी नॉन फिक्शन किताब हो, इन्नोवेट इंडिया जैसी पुस्तक हो, जो इन्नोवेटर और स्टार्टअप्स के लिए एक महत्वपूर्ण किताब साबित हुई। न्यूज़ एंकरिंग पर लिखी हुई किताब न्यूज़ एंकर हो जिसने मास कम्युनिकेशन के छात्रों की बहुत मदद की। यह सारी पुस्तकें मेरी यात्रा को बताती हैं। यात्रा कभी भी लेखक बनने की नहीं रही, यात्रा रही जो कुछ सीख रहा हूँ, उसे साझा करने की। यात्रा सतत जारी है, निश्चित ही आने वाले समय में जो कुछ सीख रहा हूं उसे फिर आने वाली पीढियां के लिए साझा करूंगा, इसी को पुस्तक कहते हैं। जीवन भी कुछ इसी तरह का है और मुझे लोगों का जीवन पढ़ना अधिक पसंद है। मैं कई दार्शनिकों के जीवन को एक किताब मानता हूं। इसी तरह की पुस्तक मुझे पसंद भी है, चाहे वह स्वामी विवेकानंद की हो, ओशो की हो या किसी अन्य लेखक की।
फ़िल्म Film ‘गोदान’ (Godaan) की कहानी क्या है, और इसमें आपका किरदार (Character) क्या है?
खलनायक की भूमिका कैसे एक गौ सेवक के रूप में परिवर्तित होती है की कहानी गोदान है। निश्चित ही इसके लिए तो फिल्म को देखना होगा, लेकिन फिर भी मेरे निजी जीवन में गौ माता के प्रति जो विश्वास, उनकी ऊर्जा को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है। जो फिल्म को मिलने वाले प्रतिसाद से बहुत बड़ा है। निश्चित ही इस फिल्म ने मेरे अंदर बहुत कुछ बदला है, खासतौर पर गौ माता की शक्ति के बारे में ।अब कोई संदेह नहीं है, वह सचमुच ऊर्जा का पुंज है। सचमुच सेहत देने वाली है, खलनायक को भी नायक बनाने वाली है। कुछ ऐसी ही कहानी है, गोदान की, जहां पर खलनायक एक नायक की भूमिका में आ जाता है और गौ सेवा को लेकर प्रेरित हो जाता है। देश भर में निकल पड़ता है, जिसको आपने देशवासियों गाने में भी देखा गया है।
आपका जीवन-दर्शन क्या है, और यह आपकी भूमिका को कैसे प्रभावित करता है?
तैरो मत बहो। यही मेरा जीवन दर्शन है। वैसे तो मूल रूप से ओशो की तरफ से वचन बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है, लेकिन मेरे जीवन में इसके बड़े मायने हैं। मैंने अपने जीवन में कभी यह सब नहीं सोचा जो कुछ मैं कर रहा हूं। इसका मतलब है आप कितना ही मेनिफेस्ट कर लें, आप उस परम शक्ति के स्तर पर जाकर मेनिफेस्ट नहीं कर सकते हैं और इस बात में मेरा कठोर विश्वास हो गया है, कि आप बस शरणागति में चले जाएं। स्वामी शरणानंद के विचारों से मैं बहुत प्रभावित हूं। उनका नाम ही शरणानंद इसलिए है, क्योंकि पूरी तरह उन्होंने शरणागति को स्वीकार किया। मैं भी कुछ हद तक इसे स्वीकार कर चुका हूँ। लेकिन यात्रा भी जारी है, और मुझे लगता है यह बहुत असरदार है। अगर आप ईश्वर में विश्वास करते हैं, तो आप पूरी तरह से ईश्वर को समर्पित कर दीजिए। अपने हर कार्य उन्हें ही समर्पित कर दें। आप अपनी समस्याओं और कठिन समय को बुरा मानते हैं लेकिन इसका भी कोई प्रयोजन होगा। ईश्वर के दृष्टिकोण से देखें तो वह आपके मानने से अच्छा बुरा नहीं होता। बल्कि आपकी अपेक्षाओं से अच्छा बुरा बन जाता है और यही ईश्वर की लीला है। इसमें मेरा बड़ा विश्वास है और यही मेरे जीवन का फलसफा है।
डॉ प्रवीण तिवारी जी, आपकी डेब्यू फ़िल्म गोदान के गीत देशवाशियों को आप पर फिल्माया गया है, जिसे प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने आवाज़ दी है, ये सब कैसे हुआ, जो आप पाठकों का बताना चाहते हैं?
फिल्म में मुझे खलनायक की भूमिका मिली। एक खलनायक पर गीत फिल्माया जाएगा यह कोई नहीं सोच सकता था। लेकिन ऐसा हुआ और यही मुझे बहुत उत्साहित करता है। जो मेरी जीवन की फिलॉसफी को और मजबूत करता है कि आपके हाथ में कुछ नहीं है। प्रयास करके भी जो बहुत से लोगों को नहीं मिलता वो आपको यात्रा में मिल जाता है। कैलाश खेर जी द्वारा गया गया गीत देशवासियों इसका एक उदाहरण है। जिसके बारे में मैंने कभी सोचा नहीं था। फिल्म में मेरी छोटी सी भूमिका थी, जो बढ़कर मुख्य खलनायक के किरदार तक पहुंची और इस खलनायक का नायक में परिवर्तित होना और उस पर फिल्म का मुख्य गीत फिल्माया जाना, इसी का एक उदाहरण है और यह चमत्कार की तरह है मेनिफेस्टेशन के सच होने की तरह है, ईश्वर में विश्वास की तरह है, यह गाना मुझे कैसे मिला, इस बात को आप इसी से समझ सकते हैं।
गौमाता के सानिध्य से बदल गई खलनायक की जिंदगी कैसे आप पाठकों को कुछ बताना चाहते हैं?
इस फिल्म को करते हुए गौ माता के प्रति, जो मेरा विश्वास जागृत हुआ, वह मेरे लिए सबसे बड़ी प्राप्ति है, क्योंकि मैं यह समझ पाया कि गौ माता सिर्फ एक जीव मात्र नहीं है, वह सचमुच में बहुत विशेष है, उसकी विशेषता को आप मनुष्य के विकास क्रम से भी देख सकते हैं। कृषि में वह महत्वपूर्ण है, इसीलिए हो सकता है कि शुरुआती दौर में हमारी वेद ऋचाओं में, उसका महत्वपूर्ण वर्णन मिलता है। आप पौराणिक कथाओं में भी उसे महत्वपूर्ण पाते हैं। लेकिन सबसे अहम बात यह है, कि आज भी जब आप किसी गाय के पास जाते हैं निश्चल भाव से उसकी सेवा करते हैं। आप उसके समीप रहते हैं, तो आप उसकी ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं। इस ऊर्जा को मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं, इसके लिए मैं आप सब से एक निवेदन करूंगा, आज किसी गौशाला में जाइए, किसी गाय के साथ अपने समय को बितायें, गाय की सेवा करिए, देखिए जीवन में कैसा परिवर्तन आता है। मैं इस बात की गारंटी लेता हूं, यदि आप गौ सेवा करेंगे तो आपके जीवन के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाएंगे। यह बहुत बड़ी प्राप्ति है, जो इस फिल्म के माध्यम से ही सही, गौ शक्ति के बारे में मुझे प्राप्त हुई है।
डॉ तिवारी, आपने खलनायक की भूमिका के लिए क्या खास तैयारी की?
खलनायक की भूमिका के लिए, मैंने कोई खास तैयारी नहीं की, खलनायक हमारे भीतर से ही निकलता है, अगर हम अपने जीवन को ही थोड़ा विस्तार देकर देखें, तो हम देखेंगे कि कई लोगों के जीवन में हम खलनायक है। कई लोगों के जीवन में हम नायक और ऐसा ही उन खलनायकों के बारे में भी है, जिन्हें हम अपने जीवन का खलनायक पाते हैं। लेकिन वह भी कई अन्य लोगों के जीवन के नायक होते हैं। तो नायक और खलनायक दृष्टिकोण का विषय होता है। खलनायक की भूमिका ने मुझे यही समझाया कि कैसे हमें दुनिया में किसी को खलनायक ना मानते हुए उसके नायक होने की संभावनाओं को देखना चाहिए। यही इस फिल्म ने मुझे सिखाया।
आप दर्शकों को क्या संदेश देना चाहते हैं और कोई तीन किताबें जो हर किसी को पढ़नी चाहिए?
द रोड लेस ट्रैवल्ड, लक फैक्टर और द पावर का now यदि तीन किताबें कहेंगे तो मैं यह बताऊंगा और इससे अधिक बहुत सी किताबें हो सकती हैं लेकिन दर्शकों से मैं अवश्य कहना चाहूंगा, सबसे बड़ी किताब आपका अपना जीवन है। उसका गहनता से अध्ययन करें, दूसरा सबसे बड़ी पुस्तक गौ माता का साथ है। आप गाय माता के पास जाएं उसकी सेवा करें, और चमत्कार देखें आप पाएंगे कि दुनिया की सबसे बड़ी किताब आपने पढ़ ली है।
आपको बता दें, फ़िल्म में अभिनेता साहिल आनंद , सिमरन, सहर्ष शुक्ला, मनोज जोशी, (Actor Manoj Joshi) उपासना सिंह (Upasna Singh) मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। फ़िल्म गोदान (Godaan), 6 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों मैं रिलीज़ होने के लिए तैयार है। फिल्म के निर्माता हैं विनोद चौधरी और इसका निर्देशन किया है अमित प्रजापति ने।










