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मेरठ में महाराजा सूरजमल जयंती पर जुटेंगे जाट नेता, सीएम भगवंत मान की मौजूदगी से बढ़े सियासी मायने

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय को लंबे समय से राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता रहा है, हालांकि बीते कुछ वर्षों में उनके सियासी असर में कुछ कमी देखी गई है। इसी पृष्ठभूमि में अगले महीने मेरठ में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक जमावड़ा होने जा रहा है, जहां जाट समाज अपने सबसे प्रसिद्ध शासक महाराजा सूरजमल की याद में शक्ति प्रदर्शन करेगा। 25 मार्च को मेरठ में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा, जिसमें जाट समाज से जुड़े कई प्रमुख नेता शामिल होंगे।

इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें किसी भी राजनीतिक दल की कोई औपचारिक सीमा नहीं होगी। अलग-अलग पार्टियों से जुड़े जाट नेता एक मंच पर नजर आ सकते हैं। कार्यक्रम में बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, राजस्थान के नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल के शामिल होने की संभावना है। इसके साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

भगवंत मान सिख धर्म को मानते हैं, लेकिन उनका संबंध जट सिख समुदाय से है। पंजाब में इस समुदाय की बड़ी आबादी है, ऐसे में उनका इस कार्यक्रम में शामिल होना इसे राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक महत्व देता है। माना जा रहा है कि उनकी मौजूदगी से जाट समाज के बीच संदेश जाएगा कि यह आयोजन केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है।

जाट समुदाय की बड़ी आबादी राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में है। खासकर हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का राजनीतिक दबदबा लंबे समय तक रहा है। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटें इसमें अहम भूमिका निभाने वाली हैं। ऐसे में यह आयोजन राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हाल के वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का समर्थन बड़ी संख्या में बीजेपी को मिलता रहा है। हालांकि राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत भी मिलते रहे हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके भूपेंद्र चौधरी भी जाट समुदाय से आते हैं।

महाराजा सूरजमल को जाटों का सबसे महान शासक माना जाता है। 1707 में राजस्थान के भरतपुर में जन्मे सूरजमल एक कुशल रणनीतिकार थे, जिस वजह से उन्हें जाटों का ‘प्लूटो’ भी कहा जाता है। उन्होंने अपने जीवन में करीब 80 युद्ध लड़े और सभी में विजय हासिल की। 1763 में मुगलों से युद्ध करते हुए वे शहीद हुए। अपने जीवनकाल में उन्होंने दो बार दिल्ली को मुगलों से छीना, आगरा के किले पर कब्जा किया और अहमद शाह अब्दाली के आक्रमण के दौरान मथुरा-वृंदावन जैसे हिंदुओं के पवित्र स्थलों की रक्षा की।

मेरठ में होने वाला यह आयोजन न सिर्फ महाराजा सूरजमल को श्रद्धांजलि होगा, बल्कि जाट समाज की राजनीतिक एकजुटता और भविष्य की दिशा का संकेत भी माना जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी खास मायने रखती है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH