हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने रविवार को राज्य की आर्थिक स्थिति की एक कड़वी सच्चाई सामने रखी। सोलहवें वित्त आयोग द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) समाप्त किए जाने के बाद राज्य की वित्तीय हालत बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। वर्षों से हिमाचल की अर्थव्यवस्था RDG के सहारे चलती रही है, लेकिन अब यह सहायता खत्म हो चुकी है। वित्त विभाग ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात में न तो कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) दिया जा सकेगा और न ही एरियर का भुगतान संभव होगा। इसके साथ ही भविष्य में नई भर्तियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) पर विचार करना पड़ेगा।
रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, सत्ता पक्ष के नेताओं और मीडिया की मौजूदगी में वित्त विभाग की ओर से एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। वित्त सचिव देवेश कुमार ने सरकार से साफ शब्दों में कहा कि राज्य को अब कई कठोर फैसलों पर विचार करना होगा। इस प्रस्तुति ने हिमाचल की आर्थिक तस्वीर सामने रख दी, जिसने सभी को चिंता में डाल दिया।
वित्त सचिव ने बताया कि RDG खत्म होने के बाद धन की भारी कमी हो गई है। ऐसे में डीए को फ्रीज करना पड़ेगा और एरियर का भुगतान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पेंशन से जुड़े कई भत्तों को खत्म करना होगा और भविष्य में कर्मचारियों की भर्ती के लिए UPS को अपनाने पर विचार करना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि जब OPS लागू की गई थी, तब हिमाचल को 1800 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज की कटौती झेलनी पड़ी थी।
इसके अलावा वित्त विभाग ने सुझाव दिया कि दो साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करना होगा और फिलहाल किसी नई भर्ती की स्थिति नहीं है। मौजूदा स्टाफ का ही युक्तिकरण करना पड़ेगा। कई सरकारी संस्थानों में से लगभग 30 प्रतिशत को बंद करने की सलाह दी गई है। नए विकास कार्य शुरू करने की स्थिति में सरकार नहीं है और कई मौजूदा योजनाओं को बंद करना पड़ सकता है। नए वेतन आयोग या वेतन संशोधन की बात तो दूर, सरकार मौजूदा खर्च भी मुश्किल से उठा पा रही है। एचआरटीसी को दी जाने वाली सब्सिडी, पानी-बिजली पर रियायत और एमआईएस जैसी योजनाओं की सब्सिडी भी खत्म करने के संकेत दिए गए हैं।
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल को पांच साल में कुल 37,199 करोड़ रुपये की RDG मिली थी, जिससे राज्य के खजाने को सहारा मिला। राज्य के अपने संसाधन सीमित हैं और बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज की अदायगी में खर्च हो जाता है। मौजूदा हालात में कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए पिछले वेतन आयोग का करीब 8500 करोड़ रुपये का एरियर और लगभग 5000 करोड़ रुपये का डीए व डीआर एरियर बकाया है, जिसे सरकार चुका पाने की स्थिति में नहीं है।
वित्त सचिव ने कहा कि आगे भी डीए और डीआर देने की संभावना बेहद कम है। विकास कार्य प्रभावित होंगे और हिमकेयर व सहारा जैसी योजनाओं के 400 से 500 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान भी फिलहाल संभव नहीं हैं। करीब 2000 करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान अगले बजट पर टल गया है। इसके अलावा सर्विस मैटर से जुड़े हाईकोर्ट के आदेशों के तहत लगभग 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा।
RDG समाप्त होने का सीधा असर सब्सिडी पर भी पड़ेगा। वित्त विभाग के अनुसार, बिजली सब्सिडी समेत सभी प्रकार की सब्सिडी खत्म करनी होंगी। मौजूदा वित्तीय वर्ष में बिजली सब्सिडी पर 1200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जिसे आगे जारी रखना मुश्किल है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर इस साल 1661 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसे लेकर भी सरकार को नए उपाय तलाशने होंगे।




