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मोबाइल एडिक्शन से बिगड़ रहा मानसिक संतुलन, योग से पाएँ समाधान: जिज्ञासा ठाकुर

मोबाइल फोन जितना स्मार्ट बनता जा रहा है, व्यक्ति उतना ही आलस्य-प्रमाद से घिरता जा रहा है। एक आम व्यक्ति दिन भर में अपने फोन को लगभग 110 से लेकर 150 बार अनलॉक करते हैं, जो चिंताजनक है। मोबाइल फोन के उपयोग और इसके प्रभावों पर आज़ विस्तार से बातचीत करेंगे योग एक्सपर्ट, जिज्ञासा ठाकुर से…

योग एक्सपर्ट जिज्ञासा ठाकुर, Ph.D (Yogic Science), आयुर्वेद संकाय, बनारस हिंदू विश्विद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश मेँ हैं

न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल के साथ योग एक्सपर्ट जिज्ञासा ठाकुर का एक्सक्लुसिव इंटरव्यू…

1. मोबाइल फ़ोन के उपयोग से एडिक्शन तक युवा, बच्चे, किशोर, महिलायें और बुजुर्ग बढ़ रहे हैं, इससे कैसे बचा जाये?

* देखिए यदि सबसे पहले मोबाइल फोन की बात करें तो वह निसंदेह बहुत उपयोगी है। जरा सोचिए कि एक पॉकेट साइज का गैजेट आपसे मिलो दूर बैठे सगे संबंधियों को देख पाते है चाहे यह काम मैसेज भेजने का हो या देशभर की बातें हो आप कहीं पर भी बैठे हो आपको बहुत आसानी से प्राप्त हो जाता है या सोशल मीडिया के द्वारा किसी भी बातों को बहुत आसानी से वायरल कर सकते हैं। इसके उपयोग बहुत है पर हर आविष्कार के दो पहलू होते हैं एक पॉजिटिव और एक नेगेटिव यदि इसे एक सीमा में रहकर और सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो यह बहुत खतरनाक भी साबित हो सकता है। आजकल हर अवस्था के लोग चाहे वह वृद्ध हो किशोर हो या छोटे बच्चे हो या युवावस्था के पीढ़ी हो हर व्यक्ति मोबाइल फोन में व्यस्त है वह अपनी अलग ही दुनिया में जी रहे हैं। कोई अपने अकेलेपन की वजह से मोबाइल फोन में खोया हुआ है तो कोई अकेले रहने के लिए मोबाइल फोन में इस्तेमाल कर रहा है हालांकि मोबाइल फोन के जरिए यह पूरी दुनिया की खोज खबर अपने पास रख रहे हैं पर स्थूल रूप से यह एक दूसरे से सोशल नहीं हो पा रहे हैं।

समस्या तो यह है कि इन सब आदतों की वजह से व्यक्ति स्वयं से दूर होता जा रहा है। उदाहरण के तौर पर एक बच्चे को ही ले लीजिए कि आजकल के बच्चे फोन के इतने आदि हो चुके हैं कि जब तक उनकी मां फोन में कार्टून ना दिखाएं बच्चे खाना नहीं खाते आजकल हर व्यक्ति कोई ड्राइविंग करते हुए तो कोई सड़क पर चलते हुए कोई समाज में बैठे हुए कहीं भी किसी भी समय में वह एक क्षण भी फोन से दूर नहीं रह पा रहा है। तो आप समझिए कि एक जो फोन एक पॉकेट साइज गैजेट है इस व्यक्ति ने बनाया है लेकिन आज फोन में इतनी पावर लोगों ने दे दिया है कि फोन ही अब इंसान को चल रहा है। यह तो सच में विचारणीय है।

यह जितना उपयोगी है उतना ही खतरनाक है इसे बचाना बहुत आवश्यक है और इस सीमा में रहकर एक जागरूकता के साथ इस्तेमाल करने की बहुत जरूरत है। पहले है सेल्फ कंट्रोल कोई भी चीज के लिए हमें आत्म नियंत्रण की आवश्यकता सबसे पहले पड़ती है हालांकि यह आदतें हमने स्वयं से लगाई है तो यह हमें आत्म नियंत्रण के द्वारा ही इसे दूर करना पड़ेगा । दूसरा यह है कि स्वयं को व्यस्त रखना हम जितना से जितना अपने आप को व्यस्त रखेंगे हम उतना ही जीवन में मस्त रहेंगे।

दिनचर्या में भी सुधार के बहुत आवश्यकता है नियमित दिनचर्या अपनी बनाएं और उसे निरंतर फॉलो करें । आजकल बहुत ऐसे ही मोबाइल में एप्स भी आते हैं जो हमारे स्क्रीन टाइम को मैनेज करते हैं तो स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करने वाला कोई अच्छे से अप उसे कर सकते हैं । और सबसे जरूरी यह है की नित्य प्रतिदिन योग को अपने जीवन में शामिल करने की बहुत जरूरत है इस जागरूकता बढ़ेगी। निरंतर आसन प्राणायाम के अभ्यास से हमें अवेयर रहेंगे कि हम क्या कर रहे हैं क्यों कर रहे हैं क्या इसके आवश्यकता है भी या नहीं आदि। लत किसी भी चीज की हो लगते हम स्वयं से ही है, तो हमें ही समाप्त करना पड़ेगा । कोई भी हमें केवल राह दिखा सकता है किंतु चलना स्वयं को ही पड़ेगा।

2.मोबाइल फोन के उपयोग से होने वाले मानसिक और शारीरिक प्रभावों के बारे में बताएं?

निरंतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल से हमारे मानसिक और शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है। मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। शोध बताते हैं कि लगातार फोन को स्क्रोल करने की वजह से मेमोरी पावर रिकॉल नहीं कर पता है जिसकी वजह से याददाश्त का कमजोर हो जाना जैसे समस्या आती है। जैसे आजकल के बच्चे कोई भी चीज को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं तो बार-बार देखते हैं कि कितने लाइक्स आए कितने कमेंट्स आए उसको चेक करते रहते हैं जितने लाइक कमेंट आते हैं उनको उतना ही खुशियां खुशी का अनुभव होता है और अगर ना आए या कम आता है तो मन दुखी हो जाता है जिसकी वजह से हारमोंस का उतार-चढ़ाव होता है जिसकी वजह से स्ट्रेस डिप्रेशन इत्यादि जैसी बीमारियां आती है कई ऐसे शोध हुए हैं जो बताते हैं कि देर रात तक जाकर फोन चलाने से नींद आने में कठिनाई आती है और लोग अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं अत्यधिक इस्तेमाल से केवल मानसिक नहीं बल्कि शारीर पर भी असर दिखता है हमेशा गर्दन झुकाकर फोन चलाना इतना हमें शून्य नहीं कर देता है कि हमें स्वयं पता नहीं चलता है कि कब बैठे-बैठे हम लेट जाते हैं या किसी तकिए के सहारे या दीवाल के सहारे हम सहारा ले लेते हैं जिसकी वजह से सर्वाइकल हो जाना बैक पेन हो जाना कलाई में दर्द होना सिरदर्द इत्यादि की समस्या देखने को मिलती है।

3. आप कैसे मानते हैं कि मोबाइल फोन का उपयोग हमारे जीवन को प्रभावित कर रहा है?

यदि आप किसी भी क्षेत्र में बात करें तो आप पाएंगे कि मोबाइल फोन हर चीज से प्रभावित कर रहा है चाहे वह बच्चों की शिक्षा को लेकर हो या उसकी एकेडमिक क्वालिटी हो स्लिप क्वालिटी हो हर एक चीज को फोन मोबाइल फोन प्रभावित कर रहा है। आजकल अभी एक ऐसी समस्या से लोग जूझ रहे हैं जिनके विषय में बहुत पता हो या ना हो पर शिकार बहुत सारे लोग हो रहे हैं खास करके किशोर अवस्था के बच्चे जिसे इमोशनल numbness कहते हैं लगातार फोन स्क्रोलिंग करने की वजह से मन में क्या चल रहा है समझ में क्या चल रहा है परिवार में क्या चल रहा है सही समय पर क्या डिसीजन लेना चाहिए या कुछ भी इन सब चीजों में वह देखना ही नहीं चाहते उदाहरण के तौर पर देखते हैं कि पहले के समय में अगर किसी से कोई बात हुई हो तो वह एक दूसरे को भाव समझते थे उसकी समस्या को निदान करने में लगते थे लेकिन आजकल किसी को कुछ भी समस्या आ रही है वह इन सब चीजों से भाग रहे हैं और कहां घुस रहे हैं फोन में स्क्रोलिंग करने में तो इसे एक तरह से इमोशनल नंबनेस कहा गया है कि भाव तो है पर व्यवहार में नहीं आ रहा है एक शून्य से पड़ गया है जिसे इमोशनल numbness कहते हैं । यही एक चीज है जो आज के आजकल के जीवन में बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।

4.आपके अनुसार, मोबाइल फोन के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

आप कैसे मानते हैं कि योग और प्राणायाम मोबाइल फोन के उपयोग को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं?
* देखिए जैसे कि हमने पहले ही कहा कि आत्म संयम के द्वारा ही यह कार्य संभव हो सकता है यह बहुत आम है कि हमें गलत चीजों की आदत बहुत आसानी से लग जाती है किंतु अच्छी आदतों के लिए प्रयास करना पड़ता है उदाहरण के तौर पर हम देख सकते हैं कि सुबह उठने के लिए हमें बहुत प्रयास की आवश्यकता होती है पर यदि ना उठे तो देर तक सोने की आदत अपने आप लग जाती है। उसी प्रकार मोबाइल फोन के लत को छुड़ाने के लिए सेल्फ कंट्रोल की बहुत आवश्यकता है यदि आपके पास करने के लिए बहुत से कार्य हो और फिर भी मन मोबाइल के पीछे ही भाग रहा है सोशल मीडिया के ही पीछे भाग रहा है मन में यह चल रहा है कि उसने लाइक्स किया कि नहीं या अभी क्या हो रहा है या कुछ भी ऐसी चीज की कुछ ना भी करना हो तो चलो 10 मिनट 5 मिनट स्क्रोल कर लें तो इसके लिए आपको स्वयं से स्ट्रांग बनना पड़ेगा और योग यही कार्य करता है निरंतर योगाभ्यास से केवल न केवल शरीर स्वस्थ होता है बल्कि मन भी शांत होता है योग हमें भीतर से जागृत करता है जिससे हमें अवेयर हो जाते है कि हमें कब क्या करना चाहिए और कब क्या नहीं करना चाहिए। योग आसक्ति को त्यागने की बात करता है नॉन अटैचमेंट की बात करता है आजकल के जीवन में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया इत्यादि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ही हमारे जीवन के रावण हैं। इसीलिए इसे सही तरीके से कैसे इस्तेमाल करना है और गलत तरीके से इस्तेमाल करने से कैसे बचाना है और कैसे योग में स्थित रहकर जीवन जीना है यह केवल योग से ही संभव हो सकता है।

5. मोबाइल फ़ोन के एडिक्शन से बचने के लिए और मेमोरी तेज़ करने के लिए योग मेँ कोनसे अभ्यास करने चाहिए डिटेल मैं बतायें?•

इन सब चीजों से स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए यदि योग की बात करें तो सूर्य नमस्कार का अभ्यास हमारे लिए अति उत्तम होगा क्योंकि निरंतर सूर्य नमस्कार के अभ्यास से यह हमारे शरीर के साथ-साथ मन को भी मजबूत बनाता है और हमें ऊर्जा प्रदान करता है इसके कार्य करने की क्षमता का विकास होता है। रोज सुबह उठकर नित्य कर्म के बाद अपने शारीरिक क्षमता के अनुसार वार्म अप करें
5 से 10 राउंड तक सूर्य नमस्कार अथवा दो से पांच राउंड प्रज्ञा योग का भी अभ्यास कर सकते हैं क्योंकि इन दोनों का अभ्यास से स्वयं में एक पूर्ण रूप से शारीरिक व्यायाम हो जाता है। इसके बाद कपालभाति क्रिया अनुलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करें
यदि संभव हो तो प्रतिदिन 10 से 15 मिनट का स्वाभाविक श्वास को साक्षी भाव से देखने का प्रयास करें और मन में शांति का अनुभव करें। ध्यान रहे योग का अभ्यास किसी कुशल शिक्षक के मार्गदर्शन में ही करें तो ज्यादा बेहतर रहेगा।

6. आपके अनुसार, मोबाइल फोन के उपयोग के क्या फायदे हैं, और कैसे हम इन फायदों का लाभ उठा सकते हैं?

जैसा कि हमने पहले ही बताया कि हर आविष्कार के दो पहलू होते हैं एक सकारात्मक और नकारात्मक निर्भर करता है कि हम किस पहलू को लेकर अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं। ठीक उसी प्रकार मोबाइल फोन के सुविधाओं की बात की जाए तो इसके भी बहुत सारे लाभ हैं इसके उपयोग के जैसे अभी 2 साल पहले लॉकडाउन लगा था तो सारे काम वर्क फ्रॉम होम हो रहे थे । बच्चों के क्लासेस फोन पर ही चल रहे थे तो इसके लिए अगर पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किया जाए तो बहुत सही रहेगा इसके अलावा जैसे ऑनलाइन बैंकिंग है सिक्योरिटी है सिक्योरिटी इमरजेंसी है उसे स्थिति में भी, या अब हम कहीं जा रहे हैं तो उसके लिए हमें लोकेशन सर्च करना है। कई ऐसे काम है जो घर बैठे मोबाइल के जरिए ही हो जाता है। तो इस प्रकार की भी इस सुविधा अनंत है अगर आप केवल इसके सकारात्मक पहलू को देखकर एक सीमित इस्तेमाल किया जाए तब।

7.आप कैसे मानते हैं कि मोबाइल फोन के उपयोग को नियंत्रित करने से हमारे जीवन में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?

इसे स्वयं से भी analysis किया जा सकता है आप सबसे पहले सुबह से लेकर रात को सोने तक आप यह चेक करें कि आपके पूरे दिन भर का स्क्रीन टाइम कितना रहा है, और उसे स्क्रीन टाइमिंग में आपने कितना अपने फोन को जरूरी कामों के लिए इस्तेमाल किया है कितना अपने व्यर्थ की चीजों में जैसे स्क्रोलिंग है सोशल मीडिया है या अन्य चीजों में आपने कितना इसमें समय गवाई हैं । इससे आपको पता चलेगा कि यदि इस समय को अपने महत्वपूर्ण या रचनात्मक कार्य में लगाते तो हमारी सेल्स ग्रोथ होती तो इस तरह का विश्लेषण करने से हमारे जीवन में सुधार हो सकता है।

8.आप कैसे मानते हैं कि मोबाइल फोन के उपयोग को नियंत्रित करने से हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

यदि मोबाइल फोन का इस्तेमाल एक सीमित तक जरूरी कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाए और अपने जीवन को एक नियमित दिनचर्या के हिसाब से जिए अपने जीवन में योग को शामिल करें कुछ रचनात्मक कार्य कुछ फिजिकल एक्टिविटी को ऐड करें तो इससे क्या होगा सबसे पहले तो आप समय पर सोने लग जाएंगे समय पर नींद आएगी जिसकी वजह से अनिद्रा का शिकायत नहीं होंगे। यदि आप फोन की दुनिया से बाहर निकाल कर लोगों से सोशलाइज होंगे, सामाजिक तौर पर आप जुड़ेंगे, अपने समय को रचनात्मक कार्यों में लगाएंगे सेल्फ डेवलपमेंट जैसे कार्य करेंगे तो इससे एंजायटी स्ट्रेस डिप्रेशन जैसी समस्याएं नहीं होगी मन शांत और प्रसन्न रहेगा।

आप कोई मैसेज देना चाहते हैं जिससे जीवन मै सुख, शांति और समृद्धि आये?

* नि संदेह मोबाइल फोन का आविष्कार इस्तेमाल करने के लिए ही बना है। लेकिन कृपया कर इसे पूर्ण जागरूकता के साथ इस्तेमाल करें हम इस दुनिया में रहते हैं तो समय के साथ बढ़ाना पड़ेगा परंतु अपने लक्ष्य को कमजोर न होने दे आप कौन हैं? आपके जीवन का लक्ष्य क्या है? आप कहां तक अभी पहुंचे हैं ? और अभी कहां तक सफर तय करना और बाकी है आदि पूर्ण जागरूकता के साथ ही जीवन जीना सही मायने में ही जीना है। अन्यथा श्वास तो सारे जीव ले ही रहे हैं, परंतु बुद्धि तो परमात्मा ने केवल हम मनुष्य को ही दिया है इसीलिए व्यर्थ की चीजों में समय न गंवाए अपना ज्यादा समय सेल्फ डेवलपमेंट में दें। लक्ष्य की प्राप्ति में दें और योग को अपने जीवन में शामिल करें। योग में रहकर अपने जीवन को जिए और अपने जीवन को सफल बनाएं।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH