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विधानसभा में सीएम योगी का जोरदार संबोधन: विकास, बजट और विपक्ष पर निशाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की प्रगति और आर्थिक मजबूती पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार विकास हो रहा है और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश की स्थिति कमजोर थी और उत्तर प्रदेश की छवि भी प्रभावित हुई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े लक्ष्य तय किए बिना बड़े परिणाम हासिल नहीं किए जा सकते। उन्होंने दावा किया कि पहले उत्तर प्रदेश को वित्तीय संस्थानों से कर्ज तक नहीं मिल पाता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि 2026-27 का बजट उनके कार्यकाल का दसवां बजट है और प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को दसवीं बार बजट पेश करने का अवसर मिला है | किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने 86 लाख किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का नाम लेते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की और सदन में हंसी का माहौल भी बना। उन्होंने कहा कि उम्र के हिसाब से उन्हें आंकड़ों में घालमेल नहीं करना चाहिए।

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण से वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। उनका कहना था कि जब सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश करती है तो उससे रोजगार सृजित होता है और राजस्व भी बढ़ता है। उन्होंने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना का जिक्र करते हुए मेरठ के ब्रास उत्पाद, गोरखपुर की टेराकोटा, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और भदोही की कालीन जैसे उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की बात कही।

युवाओं के लिए चलाई जा रही सीएम युवा योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 1.10 लाख युवाओं को ब्याजमुक्त और गारंटीयुक्त ऋण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग और सीएजी ने भी प्रदेश के कामकाज की सराहना की है। पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण सदन में पेश किया गया है और बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण उत्तर प्रदेश निवेश का केंद्र बनता जा रहा है। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने भारत मंडपम में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन की कड़ी निंदा की और इसे अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH