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यौन शोषण आरोप मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत के इस निर्देश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अदालत की अपनी प्रक्रिया होती है। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच की जाती है और सत्य सामने आता है। उन्होंने दावा किया कि मामला पूरी तरह से फर्जी है और इस संबंध में अदालत को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष नामक व्यक्ति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वह उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कंधला थाने में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज है और उस पर पहले भी झूठे मामले दर्ज कराने के आरोप लगते रहे हैं। स्वामी ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ आरोप एक ऐसे व्यक्ति के शिष्य द्वारा लगाए गए हैं जो स्वयं को जगद्गुरु कहता है। उनके अनुसार, यह सनातन धर्म और शंकराचार्य संस्था को बदनाम करने की साजिश है।

उन्होंने आगे कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा 22 में झूठी शिकायत की स्थिति में कानूनी प्रावधान मौजूद हैं और इसी के तहत वे भी अदालत पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो जाएगी। वहीं शिकायतकर्ता आशुतोष पांडे ने अदालत के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि न्याय की दिशा में यह पहला कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद नाबालिगों के साथ अशोभनीय हरकतों और यौन अपराध में शामिल रहे हैं। आशुतोष पांडे के अनुसार, अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच के भी निर्देश दिए हैं।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH