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खाड़ी संकट के बीच मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले: जल जीवन मिशन 2028 तक बढ़ा, 8.69 लाख करोड़ रुपये मंजूर

खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों में ऊर्जा संकट गहराता दिख रहा है। इसी बीच नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष का असर भारत की आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों को मिलकर काम करने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।

कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए लगभग 8.69 लाख करोड़ रुपये की कुल लागत को स्वीकृति दी गई है। इस मिशन की शुरुआत वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मंत्रिमंडल ने जल शक्ति मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़ाकर सेवा वितरण की दिशा में पुनर्गठित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक सुधारों पर जोर देते हुए मिशन की कुल लागत को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये किया गया है। इसमें 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है।

सरकार ने ‘सुजलाम भारत’ नाम से एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत हर गांव को एक विशिष्ट ‘सुजल गांव’ या सेवा क्षेत्र आईडी दी जाएगी, जिससे स्रोत से लेकर नल तक पूरी पेयजल आपूर्ति प्रणाली की डिजिटल मैपिंग की जा सकेगी।

उधर, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। ईरान द्वारा इजरायल और खाड़ी देशों पर नए हमलों के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार को लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट आई और मंगलवार को यह करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रही, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH