मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्रीय शांति योजना भेजी है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से पहुंचाया गया, जिसमें पाकिस्तानी सेना प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन युद्ध के आर्थिक प्रभावों को देखते हुए जल्द समाधान चाहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान एक महीने के युद्धविराम पर सहमत हो सकते हैं, जिसके दौरान इस प्रस्ताव पर विस्तृत बातचीत की जाएगी। इस योजना में ईरान से यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकने और मौजूदा संवर्धित सामग्री को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में देने की शर्त शामिल है।
इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने की बात कही गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। योजना में यह भी प्रस्ताव है कि ईरान अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करे। बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने और नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए सहयोग देने की बात कही गई है।
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है और ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया है। हाल ही में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में आंशिक नाकाबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल देखा गया। प्रस्ताव में नाकाबंदी हटाने के बदले प्रतिबंधों में राहत का प्रावधान भी शामिल है।
इस मामले पर अभी तक व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं इजरायल ने भी अमेरिका-ईरान वार्ता में शामिल होने से इनकार किया है। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने स्पष्ट किया कि उनका देश इस कथित बातचीत का हिस्सा नहीं है, हालांकि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी है। मिडिल ईस्ट में यह घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में किसी भी बदलाव का सीधा असर तेल की कीमतों और भारत जैसे देशों पर पड़ता है।




