पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने राज्य में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर पहले सख्त कार्रवाई का ऐलान किया था, लेकिन विरोध बढ़ने के बाद अब सरकार ने अपना रुख नरम कर लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों के खिलाफ जो भी कार्रवाई होगी, वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और पशु क्रूरता निवारण कानून के प्रावधानों के तहत ही की जाएगी।
दरअसल, मुख्यमंत्री ने पहले सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा था कि राज्य सरकार बच्चों और राहगीरों के लिए खतरा बन रहे आवारा और खतरनाक कुत्तों को हटाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू करेगी। इस बयान के बाद पशु प्रेमियों और कई सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया।
विरोध बढ़ने के बाद शुक्रवार को राज्य सरकार ने कहीं भी आवारा कुत्तों के खिलाफ कोई विशेष अभियान नहीं चलाया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने नया बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगी और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को व्यवस्थित तरीके से हटाने पर काम किया जाएगा, ताकि बच्चे, बुजुर्ग और परिवार सुरक्षित महसूस कर सकें।
कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताया विरोध
पंजाबी अभिनेत्री सोनम बाजवा ने ‘एक्स’ पर लिखा कि सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों को बड़े पैमाने पर मारने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि उनके व्यवस्थित पुनर्वास की बात कही है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार शेल्टर होम्स यानी आश्रय गृहों की व्यवस्था क्यों नहीं कर रही और अपील की कि इस समस्या का मानवीय समाधान निकाला जाए।
वहीं पंजाबी गायिका हिमांशी खुराना ने भी कहा कि आवारा कुत्तों को खत्म करना समस्या का समाधान नहीं है और इसके लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को गलत तरीके से पेश किया गया है। इसके अलावा भाजपा नेता तेजिंदर बग्गा ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर शिकायत की है।
सरकार बनाएगी आश्रय गृह
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अब कहा है कि सरकार पर्याप्त संख्या में आश्रय गृह बनाएगी, जहां आवारा कुत्तों को रखा जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कानून द्वारा अधिकृत परिस्थितियों में ही पागल, गंभीर रूप से बीमार या अत्यधिक खतरनाक कुत्तों को दर्द रहित मृत्यु देने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और यह सब पशु क्रूरता निवारण कानून के तहत ही होगा।




