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पिता को कैंसर में खोया, मां ने सिलाई कर बेटे का सपना जिंदा रखा, अब IIT पहुंचने की दहलीज पर जिगर नायक

राजस्थान के कोटा से एक बार फिर संघर्ष, मेहनत और सफलता की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा के रहने वाले जिगर नायक ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद जेईई-एडवांस्ड 2026 में सफलता हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। जिगर ने जेईई-एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 17,783 और ओबीसी-एनसीएल श्रेणी में 4,597वीं रैंक प्राप्त की है। इससे पहले उन्होंने जेईई-मेन में 98.6143 पर्सेंटाइल हासिल किया था। जिगर ने 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत और 12वीं में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। अब वह अपने गांव का पहला IIT छात्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

पिता के निधन के बाद बदल गई जिंदगी

जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात की एक टेक्सटाइल कंपनी में काम करते थे। परिवार का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन अचानक उन्हें कैंसर होने का पता चला। इलाज में परिवार की जमा पूंजी खर्च हो गई और वर्ष 2020 में उनके निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया। पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी पूरी तरह जिगर की मां अपूर्वा नायक के कंधों पर आ गई। कठिन हालात के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी और उसके सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।

सिलाई कर जुटाए पढ़ाई के पैसे

अपूर्वा नायक ने परिवार का खर्च चलाने और बेटे की शिक्षा जारी रखने के लिए गोल्ड लोन लिया। उन्होंने घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की और दिन-रात मेहनत कर परिवार को संभाला। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे को पढ़ाई से समझौता नहीं करने दिया। जिगर का कहना है कि उनकी मां का संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहा है। उन्होंने हर मुश्किल दौर में उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने की ताकत दी।

सोशल मीडिया से मिली IIT की प्रेरणा

जिगर ने बताया कि 10वीं कक्षा तक उन्हें जेईई परीक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर इंजीनियरिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े वीडियो देखने के बाद उन्हें पहली बार IIT और जेईई के बारे में पता चला। तभी उन्होंने इंजीनियर बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने का लक्ष्य तय कर लिया। इसके बाद वह कोटा आए और दो वर्षों तक नियमित कक्षा के छात्र के रूप में जेईई की तैयारी की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के दौरान फीस में भी छूट मिली।

मां और भाई के लिए बदलना चाहते हैं जिंदगी

जिगर का एक छोटा भाई भी है, जो फिलहाल सातवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। जिगर का कहना है कि उनकी मेहनत सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के बेहतर भविष्य के लिए है। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि IIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरी मां को कभी संघर्ष न करना पड़े। साथ ही मेरे छोटे भाई की शिक्षा भी बिना किसी आर्थिक परेशानी के पूरी हो सके। यही मेरा सबसे बड़ा सपना है। जिगर नायक की यह कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और परिवार के समर्थन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

 

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH