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नशे के खिलाफ पंजाब सरकार का बड़ा अभियान: 65 लाख परिवारों का सर्वे, पहली बार होगी नशा करने वालों की गणना

पंजाब में नशे की समस्या पर लगाम लगाने के लिए भगवंत मान सरकार ने एक अनोखी पहल शुरू की है। देशभर में चल रही सामान्य जनगणना से अलग राज्य में पहली बार ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना (Drug and Socio-Economic Census) कराई जा रही है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य नशे की लत से प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता लगाना है।

इस अभियान के तहत राज्य के करीब 28 हजार सरकारी और संविदा कर्मचारी, शिक्षक तथा कंप्यूटर ऑपरेटर घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं। सर्वे का कार्य 5 मई 2026 से शुरू हो चुका है और इसके अंतर्गत लगभग 65 लाख परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

सर्वे में लगे कर्मचारियों को तय संख्या में घरों का जिम्मा दिया गया है। एक परिवार से जानकारी जुटाने में औसतन 15 से 20 मिनट का समय लग रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से नशे की समस्या की जमीनी तस्वीर सामने आएगी और उसके आधार पर प्रभावी नीतियां बनाई जा सकेंगी।

नशे की चुनौती क्यों बनी बड़ा मुद्दा?

पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है। इसी कारण राज्य को अक्सर “उड़ता पंजाब” जैसे नामों से भी जोड़ा जाता रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता पर संसदीय स्थायी समिति की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में भांग, चरस, कोकीन और अन्य सिंथेटिक नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों की संख्या 63 लाख से अधिक बताई गई थी। चिंता की बात यह है कि नशे का असर बच्चों और किशोरों पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के छह लाख से अधिक बच्चे किसी न किसी रूप में नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं।

नशे के खिलाफ सरकार का अभियान

पंजाब सरकार ने वर्ष 2025 के बजट में इस विशेष जनगणना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। वहीं 1 मार्च 2025 से राज्य में ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान भी चलाया जा रहा है। पंजाब पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में इस अभियान के तहत 29,784 एफआईआर दर्ज की गईं और 39,867 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 2,021 किलोग्राम हेरोइन, 35,000 किलोग्राम पॉपी हस्क, 698 किलोग्राम अफीम, 26 किलोग्राम आईसीई और लाखों नशीली गोलियां बरामद की गईं। इसके अलावा 16.81 करोड़ रुपये की कथित ड्रग मनी भी जब्त की गई।

ड्रग ओवरडोज से बढ़ती मौतें चिंता का कारण

हालांकि सरकार और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन नशे से होने वाली मौतें अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, नशीले पदार्थों से संबंधित मौतों के मामलों में पंजाब देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। सरकार का मानना है कि यह विशेष जनगणना नशे की समस्या की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद करेगी और भविष्य में नशामुक्त पंजाब के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH