प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-पावर्ड यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइड्रोजन तकनीक से संचालित यात्री ट्रेन चलाने की क्षमता है।
‘दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन’
प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक है। इसमें 3,200 हॉर्सपावर का इंजन लगाया गया है और यह पूरी तरह धुआं रहित है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने कहा कि इस ट्रेन का डिजाइन भारतीय इंजीनियरों ने तैयार किया है और इसके साथ भारत ने रेल तकनीक के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है।
’21वीं सदी की पहचान बनेगी हाइड्रोजन ट्रेन’
प्रधानमंत्री मोदी ने रेल इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 19वीं सदी की पहचान भाप इंजन, 20वीं सदी की पहचान डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेनें रहीं, जबकि 21वीं सदी में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें भविष्य की पहचान बनेंगी। उन्होंने कहा कि जींद का नाम अब भारतीय रेलवे के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।
जींद बनेगा हाइड्रोजन तकनीक का केंद्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद में हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है। भविष्य में यहां हाइड्रोजन आधारित अन्य परियोजनाओं पर भी काम किया जाएगा, जिससे क्षेत्र तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा।
रेलवे में हुए बड़े बदलावों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय रेलवे में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि रेलवे को आधुनिक बनाने, नई तकनीक अपनाने और स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार काम किया गया है।
2030 कॉमनवेल्थ और 2036 ओलंपिक का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी का भी लक्ष्य रखता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार निवेश कर रही है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी बोले पीएम
प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति वर्ष 2014 से पहले पैदा होती, तो डीजल पर निर्भर भारतीय रेलवे को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता। अब नई तकनीकों और ऊर्जा स्रोतों की बदौलत भारत आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए अधिक तैयार हो रहा है।




