NEET UG री-एग्जाम 2026 का रिजल्ट जारी हो गया है। इस बार पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने परीक्षा में संयुक्त रूप से सबसे अधिक 715 अंक हासिल किए हैं। हालांकि, समान अंक होने के बावजूद आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक (AIR)-1 और पांशुल बंसल को AIR-2 मिला है। ऐसे में कई छात्रों के मन में सवाल उठ रहा है कि बराबर अंक होने पर रैंक अलग कैसे तय की गई।
एक जैसे अंक होने पर कैसे तय होती है रैंक?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET के लिए टाई-ब्रेकिंग नियम निर्धारित किए हैं। इन नियमों के तहत केवल कुल अंक नहीं, बल्कि अलग-अलग विषयों में प्रदर्शन और गलत उत्तरों की संख्या के आधार पर रैंक तय की जाती है।
क्या है NTA का टाई-ब्रेकिंग नियम?
यदि दो या अधिक अभ्यर्थियों के कुल अंक समान होते हैं, तो रैंक तय करने के लिए यह क्रम अपनाया जाता है—
- बायोलॉजी में अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को बेहतर रैंक दी जाती है।
- यदि बायोलॉजी के अंक भी समान हों, तो केमिस्ट्री के अंक देखे जाते हैं।
- इसके बाद भी बराबरी रहने पर फिजिक्स के अंक के आधार पर रैंक तय की जाती है।
- यदि तीनों विषयों के अंक समान हों, तो कम गलत उत्तर देने वाले उम्मीदवार को ऊंची रैंक मिलती है।
- सभी मानकों पर समानता रहने की स्थिति में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में रैंडम प्रक्रिया (कंप्यूटर ड्रॉ) के जरिए अंतिम रैंक तय की जाती है।
उम्र के आधार पर अब नहीं तय होती रैंक
पहले NEET में टाई की स्थिति में अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी नियम के तहत वर्ष 2020 में टॉपर का चयन हुआ था। हालांकि, बाद में इस नियम को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने उम्र आधारित टाई-ब्रेकिंग व्यवस्था को समाप्त कर दिया। अब रैंक केवल NTA के निर्धारित शैक्षणिक मानकों के आधार पर तय की जाती है।




