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संभल हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साटा पर इंटरपोल का शिकंजा, जारी हुआ रेड कॉर्नर नोटिस

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने फरार चल रहे गैंगस्टर शारिक साटा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, साटा को इस मामले का कथित मुख्य साजिशकर्ता माना गया है। अब उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। पुलिस का दावा है कि वह फर्जी पासपोर्ट के जरिए दुबई भाग गया था। संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के मुताबिक, अदालत पहले ही शारिक साटा को भगोड़ा अपराधी घोषित कर चुकी है। उसकी संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई भी शुरू की जा चुकी है।

सीबीआई के जरिए इंटरपोल तक पहुंचा मामला

पुलिस के अनुसार, जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने साटा के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने के लिए सीबीआई से अनुरोध किया था। इसके लिए पुलिस ने उसके खिलाफ विस्तृत दस्तावेज और जांच से जुड़ी जानकारी सीबीआई को सौंपी। इसके बाद सीबीआई ने इंटरपोल के साथ समन्वय कर रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया। पुलिस का कहना है कि साटा के खिलाफ पहले से ही लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया जा चुका है।

फर्जी पासपोर्ट से दुबई भागने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, शारिक साटा फर्जी पासपोर्ट के जरिए दुबई फरार हुआ था। जांच में उसके परिवार के सदस्यों के दुबई आने-जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि विदेश में रहते हुए भी साटा उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा था। इनमें वाहन चोरी समेत संगठित अपराध से जुड़े कई मामले शामिल बताए गए हैं।

क्या है संभल हिंसा का मामला?

24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान तनाव भड़क गया था। यह सर्वे अदालत के आदेश पर कराया जा रहा था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने शारिक साटा को कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता के रूप में चिह्नित किया।

क्या होता है रेड कॉर्नर नोटिस?

रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल की ओर से सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जारी किया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय अनुरोध होता है। इसका मकसद किसी वांछित व्यक्ति का पता लगाने और संबंधित देश के कानून के तहत उसे हिरासत में लेने में मदद करना होता है।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH