ये कहानी…राजनीति के रण में धर्मनीति की है… ये कहानी होशियारी के वक्त में सच बोलने की हिम्मत की है…ये कहानी सियासत में शब्दों की शालीनता की है… ये कहानी सियासत के उस शिखर पुरुष की है…जो समय को दो हिस्सों में बांटता है… ये कहानी भारत के उस युगपुरूष की है…जो भाग्य बदलने का माद्दा रखता है… ये कहानी हिंदुस्तान के उस शख्सियत की है…जिसने इस भूखंड की सियासत को अपने सामर्थ्य से ऐसा साधा कि समय भी उसका शुभचिंतक बन गया… ये कहानी आजादी के बाद के सात दशकों की राजनीति के सबसे बड़े पंच की है…जी हां ये कहानी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी की है…..
वो नरेन्द्र मोदी जिनके शब्द भी अटल हैं…और संघर्ष भी….वो नरेन्द्र मोदी जिनका विश्वास भी अटल है और मर्यादा भी….वो नरेन्द्र मोदी जिनकी आशा भी अटल है और देश के प्रति निष्ठा भी….वो नरेन्द्र मोदी जिनका दायित्व भी अटल है और कर्तव्य भी….वो नरेन्द्र मोदी जिनका कर्म भी अटल है…मर्म भी और धर्म भी…
ढाई हजार साल गुजर चुके किताबों में दर्ज उस कहानी को…जब प्लूटो ने राजनीति में एक ऐसा राजा की कल्पना की थी जो जमीन पर नहीं…जनता की दिलों पर राज करे… जो सरहदों से ज्यादा…शक्ति के विस्तार की बात करे… जो दुश्मनी से ज्यादा…दिलों की दोस्ती की बात करे…और रण से ज्यादा….राजधर्म की बात करे…
ये शायद संयोग ही था कि प्लूटो की उस परिकल्पना के सबसे करीबी नायक का जन्म हुआ साल 1950 में…तारीख 17 सितंबर… दामोदर दास मोदी को कहां पता था कि गुजरात बडनगर की गलियों में बड़ा हो रहा वो बच्चा एक दिन अपने शब्दों की संजीदगी से…सियासत को ऐसे साधेगा कि ये देश उसका दिवाना हो जाएगा….
जिंदगी के शुरूआती दिनों में ही उनका व्यक्तित्व लोकप्रियता का पैमाना बनने लगीं…उनकी भाषण की भंगिमाएं…भारी भीड़ खिंचने लगी…काफी कम उम्र से ही उनमें उनके विचारों का कोलाहल साफ सुनाई देने लगा था…. वक़्त के साथ नरेंद्र दामोदर दास मोदी के भाव और भंगिमाएं भरोसे में तब्दील हुई और बड़नगर का वो बेटा मां भारती की खातिर गुजरात से गुजरता हुआ देश की सबसे बड़ी पंचायत तक का सफ़र तय किया… अपने धर्म, और कर्म के साथ आज देश की बागडोर संभाले अनवरत कामयाबी की ओर नरेंद्र मोदी के कदम बढ़ रहे है…सफलता के उसी शिखर पुरुष को उनके 76वे जन्मदिन पर आज की खबर परिवार की ओर से अशेष शुभकामनाएं….




