नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ने की खबरें हैं, जबकि ईरान भी जवाबी कदम उठा रहा है। इसी बीच अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत मिला है कि आने वाली रात में ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान चलाया जा सकता है। इस संभावित कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है और पूरी दुनिया की नजर इस टकराव पर टिकी हुई है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका बड़ा बमबारी अभियान शुरू करने की तैयारी में है।
बेसेंट के मुताबिक इस अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना होगा। खासतौर पर मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल निर्माण से जुड़ी फैक्ट्रियों को निशाना बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा झटका लग सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth, सैन्य नेतृत्व और राष्ट्रपति पहले ही इस दिशा में स्पष्ट संकेत दे चुके हैं। बेसेंट का दावा है कि अब तक की सैन्य कार्रवाई से ईरान की क्षमताओं पर असर पड़ा है और अभियान प्रभावी साबित हो रहा है।
रूस के तेल को लेकर भी अहम फैसला
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वॉशिंगटन ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बेसेंट ने संकेत दिया कि भविष्य में रूसी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में और ढील देने पर भी विचार किया जा सकता है।
उनके अनुसार समुद्र में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित रूसी कच्चा तेल पड़ा हुआ है। अगर इन प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। फिलहाल मिडिल ईस्ट की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क है। यदि सैन्य कार्रवाई और तेज होती है तो इसका असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों पर पड़ सकता है।




