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गाय को ‘मां’ नहीं, ‘संपत्ति’ के रूप में….. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना नाम लिए सरकार पर किया तीखा हमला

जौनपुर/वाराणसी। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस बीच शंकराचार्य ने एक बार फिर सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान शासन गाय को ‘मां’ के रूप में नहीं बल्कि ‘संपत्ति’ के तौर पर देख रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच को चुनौती देना अब जरूरी हो गया है। शनिवार को शंकराचार्य जौनपुर में गोमती नदी के किनारे स्थित महर्षि जमदग्नि आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज के शासक उसे केवल एक संपत्ति के रूप में देखने लगे हैं, जो आस्था और परंपरा के खिलाफ है।

गौ-रक्षा के मुद्दे को लेकर शंकराचार्य ने ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू की है। यह यात्रा 7 मार्च को वाराणसी से शुरू हुई है और लखनऊ तक जाएगी। यात्रा के समापन पर 11 मार्च को लखनऊ में एक बड़ी जनसभा आयोजित करने की योजना है। शंकराचार्य ने बताया कि गाय को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करने और देशभर में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर पहले 40 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि तय समयसीमा में मांगों पर निर्णय नहीं होता है तो 11 मार्च से लखनऊ में गौ-संरक्षण के लिए बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी निमंत्रण भेजा गया है।  शंकराचार्य ने कहा कि गाय सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति में पूजनीय मानी जाती है। यदि शासन उसे केवल संपत्ति के रूप में देखता है तो यह आस्था का अपमान है। इसी कारण संत समाज इस विषय पर आवाज उठाने के लिए बाध्य हुआ है। उन्होंने कहा कि महर्षि जमदग्नि के आशीर्वाद से उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया है। संत समाज का कर्तव्य है कि समय-समय पर समाज, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अन्याय के विरुद्ध खड़ा हो।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH