मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को शिमला में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायक प्राथमिकता बैठक के दौरान कहा कि आरडीजी (राजस्व विकास योजना) बंद होने का असर हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन और पेंशन पर पड़ेगा। उन्होंने चेताया कि केंद्र सरकार के इस निर्णय से राज्य की विकास योजनाएं भी प्रभावित होंगी। सीएम सुक्खू ने बैठक के पहले सत्र में कुल्लू, मंडी और शिमला जिले के विधायकों के साथ उनकी प्राथमिकताओं पर चर्चा की। दूसरे और अंतिम सत्र में शिमला और कांगड़ा जिले के विधायकों के साथ विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने पिछले तीन वर्षों में अपने संसाधनों से 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। सीएम ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बौद्ध सर्किट की घोषणा का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश भी बौद्ध संस्कृति का बड़ा केंद्र है, लेकिन राज्य के बौद्ध सर्किट को इस योजना में शामिल नहीं किया गया, जो भेदभावपूर्ण है। उन्होंने पर्यटन विकास के लिए बजट में किसी प्रावधान के अभाव पर भी चिंता जताई।
सीएम ने विधायकों से आग्रह किया कि वे अपनी विकास योजनाओं की प्राथमिकताएं निर्धारित प्रपत्र पर शीघ्र योजना विभाग को भेजें, ताकि उन्हें वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकों द्वारा उठाई गई समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। साथ ही, उन्होंने विधायकों से प्रदेश सरकार के चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान को सफल बनाने के लिए सक्रिय सहयोग देने की अपील की। विधायक प्राथमिकता बैठक में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर शामिल नहीं हुए, हालांकि उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं लिखित रूप से जमा करवाई हैं। इसके अलावा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री सुक्खू और वे स्वयं दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा बुलाई गई नव नियुक्त जिला अध्यक्षों की बैठक में भाग लेंगे।




