हरियाणा में प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। नारनौल को अलग जिला बनाने और महेंद्रगढ़ में जिला मुख्यालय स्थापित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता रामनिवास पाटौदा और बलवान फौजी समेत कई संगठनों ने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की है।
राज्य में प्रशासनिक सुधार और विकास कार्यों को गति देने के लिए नए जिले, उपमंडल, तहसील और उपतहसील बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से दिसंबर 2024 में हरियाणा सरकार ने एक उच्च स्तरीय मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया था। इस समिति में कृष्ण लाल पवार, विपुल गोयल, महिपाल सिंह ढांडा और श्याम सिंह राणा शामिल हैं। सरकार ने इस समिति का कार्यकाल अब 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया है।
समिति इस अवधि में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक इकाइयों के गठन को लेकर विस्तृत अध्ययन करेगी। इसमें जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्र, दूरी, स्थानीय जरूरतों और विकास की संभावनाओं को आधार बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में गोहाना रैली में कुछ नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन का संकेत दिया था। उन्होंने खानपुर कलां को तहसील, जबकि बरोदा और फरमाना को उपतहसील बनाने की घोषणा की थी। इसके अलावा अन्य प्रस्ताव भी तैयार बताए गए हैं।
सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के गठन के लिए स्पष्ट मानदंड तय किए हैं। उपतहसील के लिए 10 से अधिक गांव, 60 हजार से अधिक जनसंख्या और निर्धारित क्षेत्रफल जरूरी है। तहसील के लिए 20 से अधिक गांव, 80 हजार से अधिक आबादी और अन्य आधार तय किए गए हैं। वहीं, उपमंडल और जिले के गठन के लिए भी जनसंख्या, क्षेत्रफल और दूरी से जुड़े सख्त मानक निर्धारित किए गए हैं।
हालांकि, जनगणना, परिसीमन और विशेष सर्वेक्षण (एएसआईआर) का कार्य पूरा होने तक प्रशासनिक सीमाओं में किसी भी प्रकार के बदलाव पर रोक लगी हुई है। वर्तमान में हरियाणा में 6 मंडल, 23 जिले, 80 उपमंडल, 94 तहसीलें, 49 उपतहसीलें, 143 खंड, 154 कस्बे और 6841 गांव शामिल हैं।
सरकार के पास अब तक 11 नए जिले, 14 उपमंडल, 4 तहसील और 27 उपतहसील बनाने के प्रस्ताव पहुंच चुके हैं। इनमें हिसार से अलग कर भांसी को नया जिला बनाए जाने का फैसला पहले ही हो चुका है। इसके अलावा करनाल का असंध, अंबाला का नारायणगढ़, गुरुग्राम का मानेसर और पटौदी, कैथल का पिंचोहा, हिसार का बरवाला, जींद का सफीदों, सोनीपत का गोहाना और सिरसा का डबवाली भी प्रस्तावित क्षेत्रों में शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयों के गठन के लिए संबंधित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों का प्रस्ताव अनिवार्य होगा। पूरी प्रक्रिया जनगणना और अन्य जरूरी कार्य पूरे होने के बाद ही अंतिम रूप लेगी।




