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गोवा क्लब अग्निकांड केस: अग्रिम जमानत के लिए लूथरा ब्रदर्स ने रोहिणी कोर्ट में याचिका दायर की

नई दिल्ली। गोवा के चर्चित नाइटक्लब ‘बर्चबायरोमियो लेन’ में 6 दिसंबर को हुए भीषण आग हादसे का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब तक इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन मुख्य आरोपी लूथरा बंधु अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उन्होंने दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है। इस आगजनी में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है और जांचकर्ता इस त्रासदी की जिम्मेदारी तय करने में लगे हुए हैं।

क्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरा पर गोवा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। प्रमुख धाराओं में ‘Culpable Homicide Not Amounting to Murder’ (BNS धारा 105), लापरवाही से जीवन को खतरे में डालना (BNS धारा 125) और मौत का कारण बनने वाली लापरवाही (BNS धारा 106(2)) शामिल हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता सुभाष तंवर के अनुसार, इस मामले में लगाई गई धाराएं सीधे तौर पर मालिकों की सुरक्षा उल्लंघनों और आगजनी में हुई मौतों को जोड़ती हैं। उनके मुताबिक, फायर एग्जिट की कमी, ज्वलनशील पदार्थों का अंधाधुंध इस्तेमाल और आग बुझाने के उपकरणों की अनुपलब्धता जांच एजेंसियों के लिए आरोप सिद्ध करने में मददगार साबित हो सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आग क्लब में फायरवर्क्स के दौरान पटाखों के फटने से भड़की थी। हालांकि, मालिकों ने नाइटक्लब में बुनियादी सुरक्षा नियमों की अनदेखी की। अगर अदालत में इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होता है, तो लूथरा बंधुओं को कम से कम 10 साल की सश्रम जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है, साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

कानून विशेषज्ञों के अनुसार, ‘Culpable Homicide Not Amounting to Murder’ की धारा 105 के तहत सजा मौतों की संख्या और लापरवाही की गंभीरता पर निर्भर करेगी, जबकि धारा 106(2) के लिए पांच साल तक की कैद और जुर्माना निर्धारित किया जा सकता है। गोवा सरकार ने इस घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

इस समय लूथरा बंधु फरार हैं और उन्होंने अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है। वहीं, पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में हैं। यह मामला आगे जाकर यह तय करेगा कि सुरक्षा लापरवाही के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई का उदाहरण बनता है या नहीं।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH