राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर महानगर घोष पथक के इतिहास को पहली बार हस्तलिखित रूप में संकलित किया गया है। इस विशेष दस्तावेज का लोकार्पण संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में डॉ. हेडगेवार स्मृतिमंदिर परिसर में किया गया।
यह हस्तलिखित दस्तावेज नागपुर महानगर घोष के इतिहास, उसकी शुरुआत, गतिविधियों और घोष वादन की परंपराओं एवं पद्धतियों को विस्तार से प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम के दौरान घोष वादकों ने विभिन्न रचनाओं और प्रात्यक्षिक प्रस्तुतियों के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन भी किया। इस अवसर पर मोहन भागवत ने कहा कि कहानियों के दो प्रकार होते हैं—एक इतिहास और दूसरा पुराण। इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है, जबकि पुराण में कई प्रेरक और उद्बोधक तत्व जुड़े होते हैं, चाहे वे पूरी तरह वास्तविक हों या नहीं।
उन्होंने कहा कि संघ का कार्य स्वयंसेवकों के परिश्रम से खड़ा हुआ है, न कि किसी की कृपा से। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संघ आज एक ऐसी शक्ति के रूप में खड़ा है, जो देश को दिशा देने का कार्य कर रहा है। भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ में किए जाने वाले सभी कार्य संस्कार निर्माण के लिए होते हैं और संघ कभी भी अपने नाम को इतिहास में प्रमुखता देने की इच्छा नहीं रखता, बल्कि पूरे समाज को इसका श्रेय देना चाहता है।
उन्होंने समाज में एकता और समन्वय पर बल देते हुए कहा कि सभी को स्वर में स्वर और कदम से कदम मिलाकर चलने का अभ्यास करना चाहिए। शारीरिक अनुशासन और अभ्यास से मानसिक विकास भी संभव है, जो एक वैज्ञानिक सत्य है। हाल ही में वृंदावन में आयोजित एक कार्यक्रम में भी मोहन भागवत ने गौहत्या के मुद्दे पर जनजागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे अयोध्या में राम मंदिर के लिए समाज में भावना जागृत हुई, उसी तरह गायों के संरक्षण के लिए भी समाज को जागरूक होना होगा, जिससे गोहत्या पर रोक लगाई जा सके।




