भारतीय वायुसेना की ताकत आने वाले समय में और बढ़ने जा रही है। केंद्र सरकार ने फ्रांस से अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस अहम प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई, जिससे वायुसेना की मारक क्षमता और एयर डॉमिनेंस पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
राफेल लड़ाकू विमान ने हाल के वर्षों में अपनी प्रभावशीलता साबित की है। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी क्षमता पूरी दुनिया ने देखी थी, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ तेज और सटीक कार्रवाई करते हुए उसके कई अहम एयरबेस, जिनमें नूर खान एयरबेस भी शामिल था, पर सफल हमले किए थे। इस ऑपरेशन ने राफेल की रणनीतिक ताकत और तकनीकी श्रेष्ठता को उजागर किया। भारत पहले ही फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीद चुका है, जिनकी डिलीवरी दिसंबर 2024 में पूरी हो चुकी है। ये विमान वर्तमान में अंबाला स्थित ‘गोल्डन एरोज’ और हाशिमारा स्थित ‘फाल्कन्स’ स्क्वाड्रन में तैनात हैं। अब अतिरिक्त विमानों की खरीद से वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता और भी बढ़ेगी।
राफेल अपनी अत्याधुनिक हथियार प्रणाली के लिए जाना जाता है। इसमें Meteor मिसाइल लगी है, जो हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइलों में गिनी जाती है और 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक दुश्मन को निशाना बना सकती है। इसके अलावा SCALP क्रूज मिसाइल 300 से 500 किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के बंकरों और ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम है। हैमर मिसाइल कम दूरी पर सटीक हमले के लिए उपयोगी है और मजबूत संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई है।
तकनीकी रूप से भी राफेल बेहद उन्नत है। इसमें RBE2 AESA रडार लगा है, जो एक साथ 40 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम इसे दुश्मन के रडार और मिसाइलों से बचाने में मदद करता है और खतरों को जैम कर सकता है। साथ ही हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले के जरिए पायलट को उड़ान के दौरान जरूरी जानकारी सीधे विजन में मिलती है, जिससे उसकी प्रतिक्रिया क्षमता तेज होती है। नए राफेल विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की रणनीतिक बढ़त और मजबूत होगी तथा देश की सीमाओं की सुरक्षा और अधिक सशक्त बनेगी।




