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होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने का ईरान का ऐलान, वैश्विक तेल सप्लाई और भारत पर बढ़ेगा असर

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का चौथा दिन जारी है। सोमवार रात इजरायली और अमेरिकी बलों ने ईरान के कई अहम ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल पर जवाबी कार्रवाई की। बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद है और यदि किसी जहाज ने इसे पार करने की कोशिश की तो उसे निशाना बनाया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है बेहद अहम

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान व संयुक्त अरब अमीरात स्थित हैं। इसी संकरे समुद्री रास्ते से कुवैत, कतर, सऊदी अरब, इराक, बहरीन और यूएई का अधिकांश तेल और गैस अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है।

आंकड़ों के मुताबिक, समुद्र के रास्ते होने वाले वैश्विक कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यही कारण है कि इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील केंद्र माना जाता है। जब भी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ता है, यह जलडमरूमध्य भू-राजनीतिक दबाव का प्रमुख हथियार बन जाता है।

भारत पर क्या होगा असर

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब आधा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही भारतीय तटों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दामों पर तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आयात बिल पर सीधा असर पड़ेगा।

हालांकि भारत के पास आपात स्थिति से निपटने के लिए सामरिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं। इसके अलावा भारत रूस, अमेरिका समेत 40 से अधिक देशों से तेल आयात करता है। फिर भी खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई अपेक्षाकृत कम समय में हो जाती है, जबकि रूस या अटलांटिक क्षेत्र से आने में 25 से 45 दिन तक लग सकते हैं। ऐसे में होर्मुज में किसी भी प्रकार की रुकावट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकती है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH