कर्नाटक । कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को बलात्कार और यौन उत्पीड़न मामले में निलंबित जेडी(एस) नेता प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका खारिज कर दी। यौन शोषण के मामले तब सामने आए जब 26 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले हसन में कथित तौर पर प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो वाले पेन-ड्राइव प्रसारित किए गए। जेडी(एस) ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।
इससे पूर्व न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने पहले मामले में रेवन्ना के आवेदन और इसी तरह की शिकायतों से संबंधित दो अग्रिम जमानत याचिकाओं पर दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने वकीलों को निर्देश दिया कि वे पीड़ितों के नाम का जिक्र करने से बचें, इसके बजाय वे मामले से जुड़े दस्तावेजों में विशिष्ट विवरण का जिक्र करें। रेवन्ना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभुलिंग के. नवदगी ने घटनाओं के वक्त का जिक्र करते हुए जोर दिया था कि जिस महिला ने इससे पहले रेवन्ना पर अवैध तरीके से उसके घर से निकाले जाने का आरोप लगाया था उसने शुरू में उन पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप नहीं लगाया था।
न्यायालय ने भवानी रेवन्ना द्वारा असहयोग के राज्य के आरोप को स्वीकार किया, लेकिन नोट किया कि उसने पुलिस द्वारा पूछे गए सभी 85 प्रश्नों का उत्तर दिया। यह देखा गया कि पुलिस आरोपी व्यक्तियों से यह अपेक्षा नहीं कर सकती कि वे उनके द्वारा बताए गए विशिष्ट तरीके से उत्तर प्रदान करें।




