लखनऊ के तालकटोरा कर्बला से चोरी हुए ईरानी नस्ल के दुलदुल घोड़े “अशर” को पुलिस ने बरामद कर लिया है। पुलिस ने घोड़ा चोरी करने वाले और इसे खरीदने वाले दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घोड़े की कीमत करीब दस लाख रुपये बताई जा रही है। घोड़ा तलाशने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
घोड़े की खोज के लिए पुलिस की कई टीमें लगी थीं। अब घोड़े को तालकटोरा थाना लाया गया है। घोड़े की देखभाल करने वाले पाशा की आंखों में खुशी के आंसू हैं। शिया समुदाय के लिए यह दुलदुल धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि लगभग 1400 साल पहले कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन का दुलदुल जुलजानाह भी शहीद हुआ था। मुहर्रम और चहल्लुम के जुलूसों में यह दुलदुल प्रतीक के रूप में सबसे आगे चलता है। लोग इसे हाथ से छूते और चूमते हैं, इसकी सवारी नहीं करते।
पुलिस ने लगभग 900 सीसीटीवी फुटेज देखकर घोड़े का पता लगाया। तालकटोरा कर्बला में अशर के लिए विशेष दुलदुल हाउस बनाया गया था, जिसे चोरों ने ताला तोड़कर चोरी कर लिया था। सीसीटीवी फुटेज में एक लड़का घोड़े की लगाम पकड़े हुए दिखाई दे रहा था। पुलिस ने आसपास के रास्तों के करीब 100 सीसीटीवी फुटेज खंगालकर घोड़े को उन्नाव से बरामद किया।
यह ईरानी नस्ल का घोड़ा लखनऊ में बहुत खास माना जाता है। पूरे शहर में केवल 2-3 ऐसे घोड़े हैं। इसे करीब डेढ़ साल पहले उत्तराखंड से 4–4.5 लाख रुपये में खरीदा गया था और पालने का मासिक खर्च लगभग 30 हजार रुपये आता है। घोड़ा वापस मिलने से इसके असली मालिक बेहद खुश हैं। तालकटोरा थाना क्षेत्र के खुदाबख्श कर्बला परिसर से यह घोड़ा 24 दिसंबर को चोरी हुआ था। मुहर्रम और चहल्लुम के जुलूसों में यह घोड़ा हमेशा सबसे आगे चलता है और शिया समुदाय की धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।




