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प्रवासी पंजाबियों के लिए बड़ी पहल: पंजाब सरकार ने लॉन्च किया ‘एनआरआई ई-सनद पोर्टल’, 27 सेवाएं होंगी ऑनलाइन

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रवासी पंजाबियों और एनआरआई समुदाय के लिए एक अहम और दूरदर्शी कदम उठाते हुए ‘एनआरआई ई-सनद पोर्टल’ की शुरुआत की है। इस डिजिटल पहल के जरिए विदेशों में रह रहे पंजाबियों को अब 27 महत्वपूर्ण सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस योजना का उद्देश्य एनआरआई समुदाय को दस्तावेज़ीकरण और प्रशासनिक कार्यों के लिए बार-बार पंजाब आने की परेशानी से राहत दिलाना है।

यह पोर्टल खासतौर पर कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों में बसे उन प्रवासी पंजाबियों के लिए उपयोगी साबित होगा, जो अपने मूल राज्य से जुड़े रहना चाहते हैं। इसके माध्यम से अब जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास, आय और जाति प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण जैसे अहम दस्तावेज़ घर बैठे प्राप्त किए जा सकेंगे।

अब तक इन दस्तावेज़ों के लिए एनआरआई को भारत आना पड़ता था या रिश्तेदारों के जरिए लंबी और जटिल प्रक्रिया पूरी करनी होती थी, जिसमें महीनों लग जाते थे। लेकिन नए पोर्टल के जरिए डिजिटल वेरिफिकेशन के बाद कुछ ही क्लिक में सेवाएं उपलब्ध होंगी। सरकार ने पोर्टल को यूज़र-फ्रेंडली बनाया है और यह पंजाबी व अंग्रेजी—दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा,

“हमारे प्रवासी भाई-बहन पंजाब की धड़कन हैं। उनके लिए सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाना हमारी प्राथमिकता है। एनआरआई ई-सनद पोर्टल उसी दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस पोर्टल पर और सेवाएं जोड़ी जाएंगी।

एनआरआई कल्याण मंत्रालय के अनुसार, आने वाले समय में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़, पेंशन सेवाएं और कानूनी प्रमाणपत्र भी इस पोर्टल से जोड़े जाएंगे। इसके लिए विदेशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है ताकि दस्तावेज़ों का सत्यापन तेज़ी से हो सके। डिजिटल हस्ताक्षर, आधार आधारित प्रमाणीकरण और ओटीपी वेरिफिकेशन के जरिए पोर्टल को पूरी तरह सुरक्षित बनाया गया है।

इसके साथ ही पंजाब सरकार ने वर्ष 2026 में ‘एनआरआई मिलनी’ आयोजित करने की योजना की भी घोषणा की है। इस पहल के तहत दुनिया भर में बसे पंजाबियों को एक मंच पर लाया जाएगा, जहां वे व्यापार, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे क्षेत्रों में राज्य के विकास में भागीदारी कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि एनआरआई समुदाय राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उन्हें सम्मान देना सरकार का दायित्व है।

आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 30 लाख से अधिक पंजाबी मूल के लोग बसे हुए हैं, जो हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा पंजाब भेजते हैं। हालांकि प्रशासनिक जटिलताओं के कारण उन्हें अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

इस पहल का एनआरआई समुदाय ने खुले दिल से स्वागत किया है। कनाडा में रहने वाले जसविंदर सिंह ने इसे “बड़ी राहत” बताया, जबकि लंदन में व्यवसाय करने वाली हरप्रीत कौर ने कहा कि इससे प्रवासी पंजाबी अपनी जड़ों से और मजबूती से जुड़ सकेंगे। सोशल मीडिया पर भी इस कदम को ‘गेम चेंजर’ और ‘ऐतिहासिक फैसला’ बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देगी, भ्रष्टाचार घटाएगी और सेवा गुणवत्ता में सुधार लाएगी। साथ ही यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है। पंजाब सरकार का यह कदम निश्चित रूप से प्रवासी पंजाबियों और उनकी मातृभूमि के बीच रिश्तों को नई मजबूती देगा।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH