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बीजापुर में बड़ा सरेंडर: 25 लाख का इनामी माओवादी कमांडर पापा राव 17 साथियों संग मुख्यधारा में लौटा

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियानों के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। बस्तर क्षेत्र के अंतिम सक्रिय और सबसे बड़े माओवादी कमांडरों में गिने जाने वाले पापा राव उर्फ सुन्नम चंद्रैया उर्फ मंगू दादा ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इस घटना को बस्तर में नक्सल समस्या के अंत की ओर एक अहम संकेत माना जा रहा है।

पापा राव दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का सदस्य था और साउथ सब जोनल ब्यूरो का प्रभारी भी रह चुका है। वह करीब 30 साल से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था और 1997 में स्कूल छोड़ने के बाद इस संगठन से जुड़ा था। उस पर 45 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें 2010 का तादमेटला हमला (जिसमें 76 जवान शहीद हुए) और जनवरी 2025 का अंबेली हमला (जिसमें 8 सुरक्षाकर्मी और एक नागरिक की मौत हुई) शामिल हैं। उसके ऊपर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान पापा राव ने कहा कि अब वह संविधान के दायरे में रहकर जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ेगा और लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज उठाएगा।

इस सरेंडर में कुल 18 माओवादी शामिल रहे, जिनमें डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मडवी और अनिल टाटी भी शामिल हैं। इन लोगों ने 8 एके-47, एक एसएलआर, एक इंसास राइफल समेत कई हथियार सुरक्षा बलों को सौंपे। सरेंडर कुटरू थाने में हुआ, जिसके बाद सभी को जगदलपुर ले जाया गया।

पापा राव का असली नाम सुन्नम चंद्रैया है। वह 1994 में माओवादी संगठन से जुड़ा था और कुख्यात कमांडर रमन्ना उर्फ रावलु श्रीनिवास की टीम में शामिल होने के बाद उसे ‘पापा राव’ नाम मिला। हिडमा के मारे जाने के बाद उसे क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह लंबे समय तक चुनौती बना रहा। कई बार उसकी मौत की अफवाहें भी फैलीं, लेकिन हर बार वह जीवित निकला। 2016 में सांप के काटने, 2020 में बीमारी और कोरोना काल में किडनी फेल होने से मौत की खबरें आईं, जो बाद में गलत साबित हुईं।

यह आत्मसमर्पण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च 2026 की समयसीमा से ठीक पहले हुआ है, जिसके तहत बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। लगातार अभियानों, सख्त कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते बड़ी संख्या में नक्सली पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

पापा राव जैसे बड़े कमांडर के सरेंडर के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि शेष छोटे समूहों के माओवादी भी जल्द हथियार डाल सकते हैं। सरकार की ओर से सरेंडर करने वालों को पुनर्वास, सुरक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने की योजना पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH