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कुआलालंपुर में पीएम मोदी का संबोधन: भारत की आर्थिक ताकत, तकनीकी प्रगति और वैश्विक भरोसे का किया जिक्र

मलेशिया की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुआलालंपुर में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बीते 10–11 वर्षों में भारत की तेज प्रगति को रेखांकित करते हुए बताया कि देश आज किस तरह वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने अर्थव्यवस्था, रक्षा निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े भारत के प्रदर्शन का जिक्र किया।

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2015 में जब उन्होंने प्रवासी भारतीयों से बातचीत की थी, तब भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। आज भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि उस समय ‘मेक इन इंडिया’ एक नई पहल थी, लेकिन आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग देश बन चुका है।

डिफेंस एक्सपोर्ट में 30 गुना बढ़ोतरी

पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से भारत के रक्षा निर्यात में लगभग 30 गुना की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सबसे बड़ा फिनटेक इकोसिस्टम तैयार किया है। आज दुनिया के करीब आधे रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहे हैं, जो UPI की सफलता का प्रमाण है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1.4 अरब भारतीय मिलकर वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि चाहे कोई कुआलालंपुर में जन्मा हो या कोलकाता में, भारत सभी के दिलों में बसता है और इस विकास यात्रा में प्रवासी भारतीय अहम साझेदार हैं।

वैश्विक ट्रेड डील्स और भारत पर बढ़ता भरोसा

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन और अमेरिका सहित कई देशों के साथ भारत की हालिया ट्रेड डील्स का भी उल्लेख किया। इस दौरान सभास्थल पर ‘मोदी-मोदी’ के नारे गूंज उठे। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज विश्वास भारत की सबसे मजबूत मुद्रा बन चुका है और दुनिया भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रही है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH