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भगत सिंह पर सियासत तेज: सीएम मान बोले- पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की दिशा बदल जाती

पंजाब में शहीद-ए-आजम भगत सिंह को लेकर सियासत तेज हो गई है। पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान द्वारा कांग्रेस को भगत सिंह के लिए भारत रत्न की मांग वाला प्रस्ताव पेश करने की अनुमति न देने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बड़ा बयान दिया है।

धुरी में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि अगर भगत सिंह आजाद भारत में जीवित होते और उन्हें नेतृत्व का मौका मिलता, तो देश की तस्वीर पूरी तरह अलग होती। उन्होंने कहा कि 1952 के पहले आम चुनाव के समय भगत सिंह की उम्र करीब 45 वर्ष होती और उन्हें देश का पहला प्रधानमंत्री बनना चाहिए था।

सीएम मान ने कहा कि भगत सिंह ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आजादी के बाद सत्ता गलत हाथों में नहीं जानी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा ही हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी देश पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था में फंसा हुआ है और आम लोग रोजगार व बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भगत सिंह के जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ और मात्र 23 वर्ष की आयु में 23 मार्च 1931 को वे शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि भगत सिंह की सोच और लेखन आज भी प्रासंगिक हैं, लेकिन उनकी विरासत को केवल एक दिन श्रद्धांजलि तक सीमित कर दिया गया है।

वहीं, विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया। इस पर विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भगत सिंह के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार ने उनके सम्मान के लिए ठोस कदम नहीं उठाया।

इस बीच पंजाब में रसोई गैस को लेकर भी संकट गहराता दिख रहा है। एलपीजी वितरकों का कहना है कि केंद्र सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों के दावों के बावजूद राज्य में गैस की आपूर्ति पर्याप्त नहीं है। उन्होंने लंबित मांग को पूरा करने के लिए एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH