पंजाब सरकार ने सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अमृतसर (गोल्डन टेंपल गलीआरा क्षेत्र), तलवंडी साबो और आनंदपुर साहिब को आधिकारिक रूप से ‘पवित्र शहर’ का दर्जा दिया। यह फैसला पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से पारित हुआ और इसे राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रतिबंध और धार्मिक महत्व
इन शहरों में अब मांस, शराब, तंबाकू और हर प्रकार के नशे की बिक्री और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे केवल धार्मिक फैसला नहीं, बल्कि पंजाब की ऐतिहासिक धरोहर और सभ्यतागत पहचान को पुनर्जीवित करने का प्रयास बताया।
मान ने मीडिया से कहा कि पवित्र दर्जा देने की मांग दशकों से उठ रही थी। उन्होंने याद दिलाया कि सिख धर्म के पांच तख्तों में से तीन – हरमंदिर साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (आनंदपुर साहिब) – इन्हीं शहरों में स्थित हैं।
ऐतिहासिक विशेषताएं
विशेष सत्र पहली बार चंडीगढ़ के बाहर, आनंदपुर साहिब स्थित भाई जैता जी मेमोरियल पार्क में आयोजित किया गया, जो गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के कार्यक्रमों का हिस्सा था। मुख्यमंत्री मान और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह वही धरती है जहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी और जहां तीन साहिबजादों का जन्म हुआ था।
विकास और संरक्षा परियोजनाएं
पवित्र शहर बनने के बाद राज्य सरकार ने घोषणा की कि इन तीनों नगरों में धार्मिक पर्यटन, सफाई, बुनियादी ढांचा, सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विशेष विकास परियोजनाएं लागू की जाएंगी। सरकार ने कहा कि इसके लिए आवश्यक बजट राज्य देगा और केंद्र से भी वित्तीय सहयोग मांगा जाएगा।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि उद्देश्य केवल धार्मिक महत्व बढ़ाना नहीं, बल्कि इन शहरों को सभ्यतागत धरोहर के रूप में विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां पंजाब की गौरवशाली विरासत को समझ सकें।




