पंजाब सरकार ने दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए अधिकारियों में उद्योग, निवेश प्रोत्साहन और सूचना प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन विभाग के प्रशासनिक सचिव कमल किशोर यादव और पंजाब इन्फोटेक के प्रबंध निदेशक जसप्रीत सिंह शामिल हैं। सरकार ने यह कार्रवाई प्रशासनिक आधार पर की है।
दोनों आईएएस अधिकारियों को निलंबित करने के साथ ही सरकार ने एक अतिरिक्त मुख्य सचिव और एक संयुक्त सचिव का तबादला भी कर दिया है। निलंबन के बाद दोनों अधिकारियों को चंडीगढ़ स्थित राज्य मुख्यालय में तैनात किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें केवल निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा। सरकार की ओर से जारी आदेशों में निलंबन का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्मार्टफोन की खरीद में हुई देरी से जुड़ी मानी जा रही है।
शनिवार को मुख्य सचिव द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 3(1) के तहत कार्रवाई की गई है। इस नियम के तहत यदि किसी आईएएस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो या विचाराधीन हो, तो केंद्र या राज्य सरकार उसे निलंबित कर सकती है। कमल किशोर यादव 2003 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जबकि जसप्रीत सिंह 2014 बैच के अधिकारी हैं।
इस बीच, पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। जालंधर में आम आदमी पार्टी के नेता लकी ओबेरॉय की दिनदहाड़े हत्या के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की ‘जीरो फियर’ सरकार में पंजाब खून से लथपथ हो चुका है।
सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब आप के नेता भी अपनी ही सरकार में सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जालंधर में गुरुद्वारे के बाहर आप नेता की हत्या इसका सबूत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साल के पहले हफ्ते में 9 हत्याएं हुईं और अकेले जनवरी 2026 में लगभग 25 हत्याएं दर्ज की गईं। उनके मुताबिक, ये वारदातें कोर्ट परिसर, व्यस्त बाजार, शादी समारोह और धार्मिक स्थलों तक में हो रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि वे एक दिन भी सत्ता में बने रहने के योग्य नहीं हैं।




