उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में तैनात एक दरोगा पर जांच के दौरान महिला से अभद्र व्यवहार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता का आरोप है कि दरोगा ने केस की जांच के बहाने उससे बार-बार संपर्क किया, फोन कर दबाव बनाया और निजी संबंध बनाने की कोशिश की। मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से किए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, रामनगर थाने में तैनात दरोगा अखिलेश यादव एक पारिवारिक विवाद की जांच कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पीड़िता से बातचीत शुरू की और बाद में फोन कॉल्स के जरिए लगातार संपर्क बनाने लगे। महिला का कहना है कि दरोगा उसे पति को छोड़ने और उनसे बात करने के लिए दबाव डालते थे। महिला ने स्पष्ट रूप से बताया कि वह शादीशुदा है और अपने परिवार के साथ ही रहना चाहती है, लेकिन इसके बावजूद दरोगा का व्यवहार नहीं बदला।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि दरोगा ने उसे अच्छी नौकरी दिलाने का लालच भी दिया और मना करने पर केस की जांच का धौंस दिखाया। महिला के मुताबिक, दरोगा ने उसे जबरन अपनी गाड़ी में बैठाने की कोशिश की, हाथ पकड़ा और अश्लील हरकतें कीं। विरोध करने पर उसे और उसके पति को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
महिला ने बताया कि यह मामला दिसंबर 2024 से शुरू हुआ था और समय के साथ उत्पीड़न बढ़ता गया। उसने कहा कि इज्जत के कारण वह सब कुछ सार्वजनिक रूप से नहीं बता सकती, लेकिन लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से वह परेशान हो चुकी थी। आखिरकार उसने एसपी से शिकायत की और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी मामला दर्ज कराया।पीड़िता के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल विभागीय स्तर पर मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। इस घटना ने ‘मित्र पुलिस’ की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं और लोगों में पुलिस व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।




