पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। इजराइल के ताजा हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबर है। इसके जवाब में तेहरान ने सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों की ओर मिसाइलें दागीं।
इस बीच यूनाइटेड अरब एमिरेट्स के व्यावसायिक केंद्र दुबई में भी कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। हालात को देखते हुए खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को घोषणा की कि United States ने ईरान में बड़े सैन्य अभियान शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि उद्देश्य ईरानी सेना की क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर करना और उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना है।
उधर, इजराइल डिफेंस फोर्सेज ने बयान जारी कर कहा कि इजरायल ने पश्चिमी ईरान में सरकारी और सैन्य ठिकानों पर हमलों की नई लहर शुरू की है। यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल की शुरुआती संयुक्त सैन्य पहल के करीब साढ़े तीन घंटे बाद तेज हुई। आईडीएफ के अनुसार, पश्चिमी ईरान में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
आईडीएफ ने यह भी बताया कि ईरान के खिलाफ इस संयुक्त अभियान से पहले अमेरिका और इजरायल के बीच महीनों तक करीबी और समन्वित योजना बनाई गई थी। दोनों सेनाओं के बीच गहरे तालमेल के चलते बड़े पैमाने पर हमला संभव हो पाया। इजरायल का कहना है कि यह अभियान ईरानी शासन को कमजोर करने और उसके अस्तित्व के खिलाफ बताए जा रहे खतरों को खत्म करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। लगातार हो रहे हमलों और पलटवार के बीच पूरा मिडिल ईस्ट गंभीर सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह संघर्ष सीमित रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।




