हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि वित्तीय अनुशासन और खर्च में कटौती के लिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में पदों की संख्या घटाई गई है। आईएफएस के पद 110 से घटाकर 86 कर दिए गए हैं। वहीं निचले स्तर के पद बढ़ाए गए हैं ताकि प्रशासनिक कार्य अधिक प्रभावी और जन केंद्रित बन सके।
सीएम सुक्खू ने कहा कि अनावश्यक खर्च कम करने के लिए कुछ स्कूलों और कॉलेजों का विलय किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार किसी पद को समाप्त नहीं करेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर सुक्खू ने भाजपा नेताओं से अपील की कि वे आपसी राजनीति छोड़कर राज्य के हित में प्रधानमंत्री से मिलें। उन्होंने बताया कि आरडीजी समाप्त होने से हिमाचल को 2026-31 तक हर वर्ष करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। सुक्खू ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से भी हिमाचल पर 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के संभावित प्रभावों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार को पांच वर्षों में करीब 70 हजार करोड़ रुपये मिले, जिनमें से अधिकांश खर्च पूर्व सरकार की फिजूलखर्ची और कर्ज चुकाने में लगे। वर्तमान सरकार ने अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई और सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाया। सुक्खू ने यह भी बताया कि केंद्र से सीमित अनुदान मिलने के बावजूद 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों का एरियर भुगतान कर दिया गया है। साथ ही 2016-2021 के बीच सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का बकाया भी जारी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को करीब 90 हजार करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है और प्रदेश के संसाधनों पर उसका पूरा अधिकार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार आत्मनिर्भर और मजबूत अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।




