नई दिल्ली। 8वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका को भ्रष्ट बताए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NCERT की ओर से बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल माफी स्वीकार करने से इंकार कर दिया और कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
चीफ जस्टिस ने कहा कि मीडिया में आई खबरों से मामला सामने आया और अब सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल यह जांच करेंगे कि यह सामग्री आखिर छपी कैसे। कोर्ट ने इसे संभावित साजिश बताते हुए कहा कि यह एक बड़ा कैलकुलेटेड मूव प्रतीत होता है, जिसमें भारतीय न्यायपालिका को भ्रष्ट बताया गया।
32 कॉपी बाजार में गईं, वापस मंगाई गईं
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि किताब की 32 प्रतियां बाजार में गई थीं, जिन्हें वापस मंगाया जा चुका है। पूरी किताब की दोबारा समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित चैप्टर को किसी भी तरह से जस्टिफाई नहीं किया जा सकता और NCERT इस स्वतः संज्ञान मामले में बिना शर्त माफी मांगता है। हालांकि CJI ने कहा कि जो नोटिस भेजा गया, उसमें माफी का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि क्या किताब की कॉपियां अभी भी बाजार में उपलब्ध हैं।
डिजिटल सर्कुलेशन पर भी चिंता
जस्टिस बागची ने कहा कि डिजिटल युग में एक किताब की हजारों प्रतियां बन सकती हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि यह सामग्री कितनी फैली। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि ऑनलाइन सर्कुलेशन हार्ड कॉपी से कहीं ज्यादा हो सकता है। कपिल सिब्बल ने कहा कि किताब पीडीएफ फॉर्मेट में भी उपलब्ध है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी फिजिकल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से इसे तुरंत हटाया जाए।
गहरी जांच होगी, जिम्मेदारों पर कार्रवाई
CJI ने कहा कि अदालत और गहरी जांच चाहती है। यह पता लगाया जाएगा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह केस बंद नहीं करेगा। SG मेहता ने कहा कि जिन दो लोगों ने विवादित चैप्टर तैयार किए, वे भविष्य में UGC या किसी भी मंत्रालय के साथ काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि NCERT संस्थान के साथ खड़ा है और कोई भी बचकर नहीं निकलेगा।
माफी अभी स्वीकार नहीं, कम्प्लायंस रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि माफी स्वीकार की जाए या नहीं, यह आगे तय किया जाएगा। फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि माफी genuine है या नहीं। कोर्ट ने NCERT को केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किताब की सभी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी, चाहे वे दुकानों या स्कूलों में हों, पब्लिक एक्सेस से हटाई जाएं। NCERT के डायरेक्टर को निर्देश दिया गया कि स्कूलों में भेजी गई सभी किताबें तुरंत जब्त की जाएं और कम्प्लायंस रिपोर्ट दाखिल की जाए। साथ ही सभी राज्यों के शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिवों को दो हफ्ते के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया।
CJI ने स्पष्ट किया कि किताब के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर पूरी तरह बैन रहेगा। इसे फिजिकली या डिजिटली वितरित करने की कोई भी कोशिश सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना मानी जाएगी। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका—तीनों को लोकतंत्र के सुचारू संचालन के लिए स्वायत्तता दी है। ऐसे में किसी भी संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री बेहद गंभीर मामला है।




