तेलंगाना: कोनिजेरला मंडल के बोडियाथांडा सरकारी प्राइमरी स्कूल में शुक्रवार (30 जनवरी) को मिड-डे मील खाने के बाद 38 छात्र बीमार हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 10 छात्रों की स्थिति गंभीर है। यह घटना संगारेड्डी जिले के एक अन्य सरकारी स्कूल में 45 बच्चों के बीमार पड़ने के एक दिन बाद हुई।
छात्रों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी शिकायतें हुईं। स्थानीय ग्रामीण, अभिभावक और स्कूल स्टाफ ने तुरंत प्रभावित बच्चों को खम्मम सरकारी अस्पताल पहुँचाया। वर्तमान में सभी बच्चों का उपचार जारी है।
मिड-डे मील क्या है?
सरकारी प्राइमरी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत छात्रों को दोपहर का भोजन मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। यह भोजन ताजा तैयार किया जाता है और पौष्टिक तत्वों जैसे कैलोरी, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर को सुधारना और भूख मिटाना है। इसके अलावा, यह बच्चों को स्कूल में बनाए रखने, उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉपआउट रोकने में मदद करती है। गरीब परिवारों के बच्चों के लिए यह योजना विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि कई बच्चे खाली पेट स्कूल आते हैं।
मिड-डे मील से सामाजिक समानता भी बढ़ती है, क्योंकि सभी बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यह लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और जाति/वर्ग आधारित भेदभाव को कम करने में भी योगदान देता है।
हालांकि, देश में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब मिड-डे मील खाने के बाद छात्र बीमार पड़े। इसके पीछे मुख्य कारण भोजन की सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान न देना बताया गया है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ समझौता करने जैसा है। गरीब बच्चे अपनी आवाज नहीं उठा पाते, इसलिए भोजन की गुणवत्ता में कमी गंभीर चिंता का विषय है।




