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रमजान का पाक महीना शुरू, जानिए रोजा रखने के नियम और इसकी अहमियत

देश में 18 फरवरी को रमजान के चांद का दीदार होते ही इबादत और बरकत के महीने की शुरुआत हो गई। रमजान का आगमन होते ही मस्जिदों में नमाज अदा करने वालों की संख्या बढ़ जाती है और बाजारों में खजूर, फलों व सेहरी के सामान की रौनक दिखाई देने लगती है। आज रमजान का पहला रोजा रखा जा रहा है। इस पवित्र अवसर पर जानते हैं रोजा रखने के नियम, इसकी अहमियत और किन परिस्थितियों में रोजा रखा या छोड़ा जा सकता है।

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, पवित्र ग्रंथ कुरान का अवतरण इसी महीने में हुआ था। यही कारण है कि रमजान को बरकत, माफी और मुक्ति का महीना कहा जाता है। रोजा इस्लाम के पांच स्तंभों में शामिल है। इसका उद्देश्य केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि आत्मा और व्यवहार को भी अनुशासित करना है। रोजा रखने वाले व्यक्ति को रोजेदार कहा जाता है। रोजेदार दिनभर भूख-प्यास सहन कर जरूरतमंदों की तकलीफ को महसूस करता है और अपने अंदर सब्र व संयम विकसित करता है।

किसे रखना चाहिए रोजा

इस्लाम में हर स्वस्थ और समझदार वयस्क मुसलमान के लिए रोजा रखना अनिवार्य माना गया है। हालांकि बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, यात्रा कर रहे लोग और मासिक धर्म के दौरान महिलाएं रोजा न रखने की छूट पा सकती हैं। छूटे हुए रोजों की भरपाई बाद में करने के नियम भी निर्धारित किए गए हैं।

सेहरी और इफ्तार का महत्व

रमजान में रोजा सुबह फज्र की नमाज से पहले सेहरी के साथ शुरू होता है और सूर्यास्त के समय इफ्तार के साथ समाप्त होता है। सेहरी में पौष्टिक और हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है, ताकि दिनभर शरीर में ऊर्जा बनी रहे। वहीं इफ्तार आमतौर पर खजूर और पानी से किया जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजेदार खाना-पीना, धूम्रपान और बुरे व्यवहार से परहेज करते हैं। इस दौरान इबादत, कुरान पाठ और नेक कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

किन बातों से टूटता है रोजा

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार जानबूझकर खाना-पीना या धूम्रपान करने से रोजा टूट जाता है। इसके अलावा झूठ बोलना, अपशब्द कहना, गुस्सा करना या किसी को ठेस पहुंचाना भी रोजे की भावना के खिलाफ माना गया है। रोजे में केवल पेट ही नहीं, बल्कि नजर और जुबान पर भी नियंत्रण रखने की सीख दी जाती है। रमजान का महीना आत्मसंयम, करुणा और आध्यात्मिक शुद्धि का संदेश देता है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH