उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अनुराग यादव को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पर्यवेक्षक पद से हटा दिया गया है। उन्हें तत्काल यूपी बुला लिया गया है। बुधवार को चुनाव आयोग के दिल्ली दफ्तर में हुई तीन घंटे लंबी बैठक में पश्चिम बंगाल के डीजीपी, मुख्य सचिव, पर्यवेक्षक और अन्य राज्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वर्चुअल बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त भी मौजूद थे।
बैठक के दौरान अनुराग यादव से उनके विधानसभा क्षेत्र में कुल पोलिंग बूथ की संख्या पूछी गई, जिसकी जानकारी वह तुरंत नहीं दे पाए। आयोग ने अधिकारी की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। इस पर अनुराग यादव ने जवाब दिया, “आप हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते, हमने इस सेवा में अपने 25 साल दिए हैं।” इसके बाद तुरंत उन्हें पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया गया।
अनुराग यादव विवादों से पहले भी जुड़े रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें 29 मार्च को पश्चिम बंगाल चुनाव के पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया था, लेकिन 10 दिन बाद उनका तबादला समाज कल्याण और सैनिक कल्याण विभाग में कर दिया गया। इससे पहले वह सूचना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और आईटी विभाग के प्रमुख सचिव रह चुके हैं। आईटी विभाग में रहते हुए उन्होंने एआई पुच कंपनी के साथ 25,000 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता किया था, जबकि कंपनी की कुल संपत्ति केवल 50 करोड़ थी। इस विवाद के बाद यूपी सरकार ने 9 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर किया, जिनमें अनुराग यादव भी शामिल थे।




