लखनऊ। सियासत की लड़ाई में जीत की वैतरणी को पार करने के लिए पार्टियां ऐसे उम्मीदवारों को टिकट देने में संकोच नहीं करती, जिनके ऊपर क्रिमिनल केस हों क्योंकि चुनावी लड़ाई में जीत पाने के लिए पार्टियों को ऐसे दाग और दागी दोनों अच्छे लगते हैं। लगभग हर राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों के दामन दागदार हैं। वो चाहे समाजवादी पार्टी हो या फिर बीजेपी या फिर कांग्रेस हो या RLD। क्योंकि इन सभी पार्टियों की एक ही फलसफा है। चुनाव में जीत चाहिए। चाहे उसके लिए दागियों को ही टिकट क्यों ना देना पड़े।
उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में सभी 403 विजेता उम्मीदवारों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया है। विजेता उम्मीदवारों द्वारा घोषित आपराधिक मामलों की बात करे तो 403 में से 205 (51%) विजेता उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किये हैं। जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में 402 में से 143 (36%) विधायको ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किये थे।
इस बार 158 (39 %) विजेता उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किये है जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में 402 में से 107 (26%) विधायकों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किये थे। 5 विजेता उम्मीदवारों ने अपने ऊपर हत्या से सम्बंधित मामले घोषित किये हैं। 29 विजेता उम्मीदवारों ने अपने ऊपर हत्या का प्रयास से सम्बंधित मामले, 6 विजेता उम्मीदवारों ने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से सम्बंधित मामले, 6 में से 1 विजेता उम्मीदवार ने अपने ऊपर बलात्कार से सम्बंधित मामला घोषित किया हैं। चुनाव कोई भी हो। पार्टी कोई भी हो। उम्मीदवारों का दागी होना कोई नई बात नहीं है। इस बार भी पार्टियों ने दागी उम्मीदवारों को जमकर टिकट बांटे।




